अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना: राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल विभाग को फटकारा, प्रमुख सचिव को तलब किया

Update: 2026-02-19 06:23 GMT

राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना और पूर्ण उपेक्षा व अनादर करार दिया। अदालत ने विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर देरी के संबंध में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।

जस्टिस संजीत पुरोहित की एकल पीठ कॉलेज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने फिजियोथेरेपी संस्थान स्थापित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया, लेकिन राज्य सरकार की ओर से उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इस पर याचिकाकर्ता ने वर्ष 2023 में हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि तीन माह के भीतर आवेदन पर निर्णय लिया जाए। इसके बावजूद निरीक्षण नहीं किया गया जिसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी। बाद में निरीक्षण तो हुआ लेकिन उसकी रिपोर्ट याचिकाकर्ता को उपलब्ध नहीं कराई गई। सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत आवेदन करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला।

याचिका में आरोप लगाया गया कि सकारात्मक निरीक्षण रिपोर्ट होने के बावजूद कॉलेज की स्थापना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है।

अदालत ने नवंबर, 2024 में राज्य को निरीक्षण रिपोर्ट अभिलेख पर रखने का निर्देश दिया। इसके बाद नवंबर, 2025 में भी यही निर्देश दोहराते हुए अंतिम अवसर प्रदान किया गया। इसके बावजूद राज्य ने फिर समय की मांग की।

इस पृष्ठभूमि में अदालत ने कहा,

“यह कोई एकमात्र मामला नहीं है। अन्य कई मामलों में भी जहां इस न्यायालय ने संस्थानों की निरीक्षण रिपोर्ट अभिलेख पर रखने के निर्देश दिए प्रतिवादी विभाग ने पालन नहीं किया। यह विभाग की कार्यप्रणाली में खामियों अपारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।”

हाइकोर्ट ने प्रमुख सचिव, मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग को 25 फरवरी, 2026 को अदालत में उपस्थित होने और अदालत के आदेशों के पालन में हुई देरी के संबंध में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।

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