संविदात्मक और नियमित नियुक्तियों के लिए अलग-अलग आयु सीमा असंवैधानिक : राजस्थान हाइकोर्ट

Update: 2026-01-13 06:02 GMT

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि एक ही पद के लिए संविदात्मक और नियमित नियुक्तियों में अलग-अलग न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित करना असंवैधानिक है। हाइकोर्ट ने राजस्थान संविदात्मक भर्ती से सिविल पद नियम, 2022 के नियम 6 को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है।

डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने पाया कि 2022 के नियमों के तहत संविदात्मक नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय की गई, जबकि उसी पद पर नियमित भर्ती के लिए राजस्थान चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 1965 के अंतर्गत न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। अदालत ने कहा कि जब पद, शैक्षणिक योग्यता, कार्य की प्रकृति, दायित्व और जिम्मेदारियां दोनों ही प्रकार की नियुक्तियों में समान हैं तो केवल नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर अलग आयु सीमा तय करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है।

हाइकोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार इस बात को साबित करने में पूरी तरह असफल रही कि संविदात्मक नियुक्ति के लिए 21 वर्ष की आयु सीमा तय करने के पीछे कोई ठोस और समझ में आने वाला अंतर मौजूद है। अदालत ने कहा कि ऐसी व्यवस्था न केवल मनमानी है, बल्कि शत्रुतापूर्ण भेदभाव को भी जन्म देती है, क्योंकि इससे नियमित नियुक्ति के लिए योग्य अभ्यर्थी उसी पद पर संविदात्मक नियुक्ति के लिए अयोग्य हो जाते हैं।

यह मामला सहायक नर्स मिडवाइफ/महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद से जुड़ा था, जिसके लिए राज्य सरकार ने दो अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाएं शुरू की थीं। एक प्रक्रिया नियमित नियुक्ति के लिए थी, जिसमें न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई थी, जबकि दूसरी प्रक्रिया संविदात्मक नियुक्ति के लिए थी, जिसमें न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई। आयु के अलावा सभी अन्य पात्रता शर्तें समान होने के बावजूद कई अभ्यर्थी संविदात्मक भर्ती से बाहर हो गए, जिसके बाद उन्होंने 2022 के नियमों के नियम 6 को चुनौती दी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि एक ही पद के लिए समान शैक्षणिक योग्यता और समान कार्य-दायित्व होने के बावजूद, केवल नियुक्ति के तरीके के आधार पर अलग-अलग न्यूनतम आयु सीमा तय नहीं की जा सकती। अदालत ने इस तर्क से सहमति जताते हुए अनुच्छेद 14 के तहत विकसित 'उचित वर्गीकरण' की कसौटी पर नियम 6 की जांच की।

हाइकोर्ट ने कहा कि केवल वर्गीकरण कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह किसी वास्तविक और ठोस अंतर पर आधारित हो और उसका उद्देश्य से सीधा संबंध हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1965 के नियमों और 2022 के नियमों के तहत चयनित अभ्यर्थियों के बीच ऐसा कोई अंतर नहीं है, जो अलग न्यूनतम आयु सीमा को न्यायोचित ठहरा सके। केवल यह तथ्य कि 2022 के नियम संविदात्मक नियुक्तियों से संबंधित हैं, अपने आप में अलग आयु सीमा तय करने का आधार नहीं बन सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि जब दोनों ही प्रकार की नियुक्तियों के लिए शैक्षणिक योग्यता शब्दशः समान है, तो यह तर्क भी स्वीकार्य नहीं है कि संविदात्मक भर्ती किसी विशेष विशेषज्ञता या विशेषज्ञ को नियुक्त करने के उद्देश्य से की जा रही है।

इन सभी कारणों से राजस्थान हाइकोर्ट ने 2022 के नियमों के नियम 6 को उस सीमा तक रद्द कर दिया, जहां वह संविदात्मक नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित पद के लिए संविदात्मक नियुक्ति में भी न्यूनतम आयु वही मानी जाएगी, जो 1965 के नियमों के तहत नियमित नियुक्ति के लिए निर्धारित है यानी 18 वर्ष।

Tags:    

Similar News