बिना कारण कैदी को 800–1000 किमी दूर जेल में भेजना असंवैधानिक: राजस्थान हाइकोर्ट ने आदेश किया रद्द

Update: 2026-02-21 06:35 GMT

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक विचाराधीन बंदी को उसके गृह नगर से 800–1000 किलोमीटर दूर स्थित जेल में स्थानांतरित करने के आदेश को निरस्त किया। अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस कारण के किया गया ऐसा स्थानांतरण बंदी के परिवार पर अनुचित और अत्यधिक बोझ डालता है।

जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के परिवार को इतनी लंबी दूरी तय कर मिलने के लिए बाध्य करना, जबकि स्थानांतरण के लिए कोई सुरक्षा या प्रशासनिक आवश्यकता दर्शाई नहीं गई, पूर्णतः अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है। इसलिए यह आदेश विधि की दृष्टि में टिकाऊ नहीं है।

मामले में याचिकाकर्ता को श्रीगंगानगर जेल में रखा गया। बाद में उसे डूंगरपुर जेल स्थानांतरित कर दिया गया, जो उसके निवास स्थान से लगभग 800 से 1000 किलोमीटर दूर है। रिकॉर्ड में यह नहीं दर्शाया गया कि स्थानांतरण सुरक्षा कारणों या किसी प्रशासनिक आपात स्थिति के कारण आवश्यक था। इसके विरुद्ध बंदी ने हाइकोर्ट का रुख किया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यदि स्थानांतरण आवश्यक भी होता तो भौगोलिक दृष्टि से निकट और अधिक सुलभ विकल्प उपलब्ध थे किंतु प्रशासन ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया।

अदालत ने कहा,

“याचिकाकर्ता के परिवारजन उसी शहर में निवास करते हैं और साधारण सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसी स्थिति में उनसे यह अपेक्षा करना कि वे केवल मुलाकात के लिए लंबी और कठिन यात्रा करें एक अनुचित और असंगत कठिनाई थोपने के समान है। राजस्थान के पश्चिमी छोर पर स्थित श्रीगंगानगर से दक्षिणी क्षेत्र में स्थित डूंगरपुर तक यात्रा करना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि अत्यधिक बोझिल भी है।”

हाइकोर्ट ने माना कि इस आदेश से याचिकाकर्ता के परिवार पर अत्यधिक और अन्यायपूर्ण भार पड़ा है। अतः स्थानांतरण आदेश को निरस्त किया जाता है।

इस निर्णय के साथ अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि बंदियों के स्थानांतरण में प्रशासनिक विवेक का प्रयोग उचित तर्कसंगत और मानवीय आधार पर होना चाहिए।

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