सरकारी नौकरी में अलग-अलग तैनाती को 'परित्याग' नहीं माना जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

Update: 2026-05-15 08:13 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत पति-पत्नी का अलग-अलग स्थानों पर रहना असामान्य नहीं है। केवल नौकरी की तैनाती के कारण अलग रहना अपने आप में “परित्याग” नहीं माना जा सकता और न ही इसे तलाक का आधार बनाया जा सकता है।

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह भी कहा कि हर झगड़ा, कटु शब्द या घरेलू विवाद “क्रूरता” की श्रेणी में नहीं आता।

अदालत ने कहा कि तलाक के लिए क्रूरता इतनी गंभीर होनी चाहिए, जिससे पीड़ित पक्ष के मन में यह उचित आशंका पैदा हो कि दूसरे पक्ष के साथ रहना हानिकारक या असुरक्षित होगा।

मामला फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील से जुड़ा था, जिसमें पति की तलाक याचिका खारिज कर दी गई।

पति का दावा था कि उसकी पत्नी सरकारी नौकरी के कारण दूसरे स्थान पर तैनात थी और उसने उसे छोड़ दिया। उसने कहा कि दोनों 27 वर्षों से अलग रह रहे हैं। इस दौरान उसने पत्नी की सहमति से दूसरी महिला के साथ “नाता विवाह” भी कर लिया।

पति ने अदालत में कहा कि उसने वैवाहिक संबंध बहाल करने की कोशिश की, लेकिन पत्नी ने उसके साथ रहने से इनकार किया। इसलिए वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं और तलाक दे दिया जाना चाहिए।

हालांकि, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि इस पूरे मामले में गलती स्वयं पति की थी और वह अपने ही गलत आचरण का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।

अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,

“जो व्यक्ति पहली वैध शादी के रहते दूसरी शादी करने की खुलेआम घोषणा करे, अपनी विधिक पत्नी को उपेक्षित स्थिति में छोड़ दे और फिर उन्हीं परिस्थितियों का लाभ उठाकर अदालत से तलाक मांगे, उसे पहले वैवाहिक कानून के मूल सिद्धांत समझने चाहिए।”

खंडपीठ ने कहा कि तलाक कोई अधिकार नहीं है, खासकर तब जब याचिकाकर्ता ने स्वयं ऐसी परिस्थितियां पैदा की हों जिनकी शिकायत वह अदालत में कर रहा है।

अदालत ने कहा कि पति पहले पत्नी को छोड़कर दूसरी महिला के साथ रहने लगा और अब उसी गलत स्थिति को कानूनी रूप देने के लिए तलाक मांग रहा है।

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सरकारी नौकरी के कारण अलग-अलग स्थानों पर रहना “परित्याग” नहीं माना जा सकता।

अदालत ने आगे कहा कि दूसरी शादी के बाद पत्नी का पति के साथ रहने से इनकार करना स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी।

खंडपीठ ने कहा,

“कोई व्यक्ति पहले स्वयं गलत काम करे और फिर उसी गलत काम पर पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया को तलाक का आधार बनाए, यह स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि किसी पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह ऐसे पति के साथ वैवाहिक जीवन बिताए, जिसने दूसरी महिला को पत्नी बनाकर खुलेआम उसके साथ रहना शुरू कर दिया हो और उससे बच्चे भी हों।

क्रूरता के आरोपों को भी अदालत ने खारिज किया। अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा पुलिस में शिकायत करना, साथ रहने से इनकार करना या विरोध करना पति के अपने आचरण का सीधा परिणाम था।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पति की तलाक याचिका खारिज की।

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