समन की कथित अस्वीकृति पर एकतरफा कार्यवाही से पहले प्रोसेस सर्वर की जांच अनिवार्य: राजस्थान हाइकोर्ट

Update: 2026-02-04 08:05 GMT

राजस्थान हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन की तामील रिपोर्ट को स्वीकार करना कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक गंभीर न्यायिक कार्य है। यदि समन की सेवा से संबंधित रिपोर्ट शपथ-पत्र पर नहीं है तो अदालत का दायित्व है कि वह प्रोसेस सर्वर की जांच करे। यहां तक कि यदि रिपोर्ट शपथ-पत्र पर भी हो, तब भी उसकी सत्यता परखने के लिए प्रोसेस सर्वर से पूछताछ करना अदालत के विवेकाधिकार में है।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि समन जारी करने का उद्देश्य संबंधित पक्ष को उसके विरुद्ध चल रही कार्यवाही की जानकारी देना है ताकि उसके पीछे कोई निर्णय न लिया जाए। इसलिए किसी भी पक्ष के विरुद्ध एकतरफा कार्यवाही से पूर्व सभी प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं का पालन करना अदालत का प्राथमिक कर्तव्य है।

हाइकोर्ट ने कहा कि किसी प्रतिवादी के विरुद्ध एकतरफा कार्यवाही करने के लिए समन की विधिवत सेवा का प्रमाण अनिवार्य शर्त है। ऐसे मामलों में ट्रायल कोर्ट के लिए यह आवश्यक था कि वह प्रोसेस सर्वर और समन की कथित अस्वीकृति के गवाहों को शपथ पर जांचती, ताकि समन की झूठी तामील या अस्वीकृति की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।

मामले की पृष्ठभूमि

हाइकोर्ट याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता ने उसके विरुद्ध पारित एकतरफा आदेश को निरस्त करने से इंकार किए जाने को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता के खिलाफ एक बिक्री विलेख को निरस्त कराने के लिए वाद दायर किया गया। ट्रायल कोर्ट ने समन तामील रिपोर्ट में यह उल्लेख होने के आधार पर कि याचिकाकर्ता ने समन स्वीकार करने से इंकार कर दिया, एकतरफा कार्यवाही करते हुए वाद का निस्तारण कर दिया।

इसके बाद याचिकाकर्ता द्वारा एकतरफा आदेश को निरस्त कराने हेतु आवेदन किया गया, जिसे खारिज कर दिया गया। इसी आदेश को हाइकोर्ट में चुनौती दी गई।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जिन गवाहों की उपस्थिति में समन उसके निवास स्थान पर चस्पा किया गया, वे उस गांव के निवासी नहीं थे, बल्कि पड़ोसी गांव से संबंधित थे। ऐसे में उनकी मौके पर उपस्थिति संदेहास्पद है। इसके बावजूद न तो उन गवाहों की और न ही प्रोसेस सर्वर की अदालत में जांच की गई।

यह भी कहा गया कि बिक्री विलेख का एक गवाह, जो न तो आवश्यक और न ही उपयुक्त पक्षकार था, उसे जानबूझकर वाद में शामिल किया गया। समन की तामील के बाद उस गवाह ने प्रतिवादियों के पक्ष में स्वीकारोक्ति युक्त लिखित बयान प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर वाद का एकतरफा निस्तारण कर दिया गया।

हाइकोर्ट के निष्कर्ष

हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि समन तामील रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाले गवाह यदि भिन्न गांव के निवासी हों तो उनकी उपस्थिति संदेह के घेरे में आती है।

अदालत ने कहा कि यदि समन की अस्वीकृति के आधार पर एकतरफा डिक्री पारित की जाती है तो ट्रायल कोर्ट का यह दायित्व है कि वह प्रोसेस सर्वर की जांच करे, जो इस मामले में नहीं की गई।

हाइकोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 के नियम 17 और 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि समन की सेवा को वैध मानने से पहले, विशेषकर तब जब रिपोर्ट में समन अस्वीकार किए जाने का उल्लेख हो, अदालत को यह तय करना आवश्यक है कि समन वास्तव में विधिवत तामील हुआ या नहीं। इसके लिए प्रोसेस सर्वर की जांच आवश्यक है, भले ही उसकी रिपोर्ट शपथ-पत्र पर ही क्यों न हो।

अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि एकतरफा डिक्री बिक्री विलेख के गवाह के लिखित बयान के आधार पर पारित की गई, जिसने प्रतिवादियों का समर्थन किया।

हाइकोर्ट ने कहा कि समन जारी करने के उद्देश्य और परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता के विरुद्ध एकतरफा कार्यवाही करना सुरक्षित नहीं था। परिणामस्वरूप, हाइकोर्ट ने एकतरफा डिक्री को निरस्त करते हुए मामले को पुनः विचारार्थ ट्रायल कोर्ट को भेज दिया।

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