शादी और बच्चे के हित को देखते हुए पीड़िता को दोबारा बुलाने की अनुमति: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए आरोपी की उस अर्जी को मंजूरी दी, जिसमें उसने पीड़िता और उसकी मां को दोबारा गवाही के लिए बुलाने की मांग की थी। अदालत ने यह निर्णय आरोपी और पीड़िता के बीच विवाह तथा उनसे जन्मी बच्ची के हित को ध्यान में रखते हुए दिया।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि यदि बदली हुई परिस्थितियों में पीड़िता और उसकी मां के बयान फिर से दर्ज नहीं किए गए तो इससे उनके वैवाहिक जीवन और उनकी बेटी के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अदालत ने प्राचीन ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय केवल विवाह टूटने के मामलों का निर्णय करने वाली संस्था नहीं है बल्कि जहां बच्चों का भविष्य जुड़ा हो, वहां वह विवाह की रक्षा करने की भी जिम्मेदारी निभाती है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब परिवार सुरक्षा देने में विफल हो तो न्यायालय को संरक्षक की भूमिका निभानी होती है।
मामले में आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और POCSO कानून के तहत मुकदमा चल रहा था, जिसमें पहले ही पीड़िता और उसकी मां के बयान दर्ज हो चुके थे। बाद में आरोपी ने पीड़िता से विवाह कर लिया और वर्ष 2020 में उनकी एक बेटी भी हुई।
इन्हीं बदली परिस्थितियों के आधार पर आरोपी ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 311 के तहत आवेदन देकर दोनों गवाहों को पुनः बुलाने की मांग की थी जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज किया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 311 का उद्देश्य सत्य का पता लगाना और न्यायपूर्ण निर्णय देना है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रावधान का उपयोग सावधानी से किया जाना चाहिए ताकि किसी पक्ष को अनुचित लाभ या नुकसान न हो।
अंततः हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि पीड़िता और उसकी मां को दोबारा बुलाकर उनके बयान पुनः दर्ज किए जाएं।