डिजिटल ठगी के खिलाफ देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान की जरूरत: राजस्थान हाइकोर्ट

Update: 2026-02-03 09:30 GMT

डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताते हुए राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया, टीवी और रेडियो के माध्यम से देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि आम लोगों को ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा सके।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह टिप्पणी दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। इन आरोपियों के खिलाफ कई साइबर शिकायतें दर्ज थीं और उनके बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।

मामले में आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि गिरोह का मुख्य सरगना कोई और है और उनके बैंक खातों का दुरुपयोग किया गया।

यह भी कहा गया कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। हालांकि, हाइकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता बड़ी धनराशि की संलिप्तता और संगठित तरीके से अपराध किए जाने को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

इस पृष्ठभूमि में हाइकोर्ट ने वैश्विक स्तर पर साइबर अपराधों विशेषकर डिजिटल ठगी में हो रही तेज वृद्धि को रेखांकित किया। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल ठगी साइबर अपराधों का सबसे खतरनाक और छिपा हुआ रूप बन चुकी है, जो लोगों की जीवन भर की कमाई को चंद पलों में खत्म कर रही है।

कोर्ट ने माना कि भले ही बैंकों ने अपने डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित करने के लिए उन्नत उपाय किए हों लेकिन साइबर हमलों की बढ़ती जटिलता के कारण समय रहते ठगी का पता लगाना मुश्किल होता जा रहा है।

हाइकोर्ट ने कहा,

“डिजिटल ठगी हमारे आपस में जुड़े संसार के लिए एक गंभीर खतरा है। इससे निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। अलग-अलग देशों ने कानून, जन-जागरूकता अभियान, तकनीकी नवाचार और आपसी सहयोग जैसे उपाय अपनाए हैं। अंततः लोगों को जानकारी और साधनों से सशक्त बनाना इस लड़ाई में सबसे अहम है।”

सोशल मीडिया कंपनियों पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट ने कहा कि कुछ कंपनियों द्वारा डेटा बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिसका साइबर अपराधी दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे मामलों में निर्दोष लोगों को बचाने के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए और दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए ताकि पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें। साथ ही यदि किसी खाते में अनधिकृत लेन-देन की सूचना दी जाती है तो बैंकों की जिम्मेदारी है कि आगे कोई और अनधिकृत ट्रांजैक्शन न होने दिया जाए।

अंत में हाइकोर्ट ने आदेश दिया कि इस फैसले की प्रति वित्त मंत्रालय और वित्त विभाग, गृह मंत्रालय पुलिस महानिदेशक और भारतीय रिजर्व बैंक को भेजी जाए ताकि आवश्यक अनुपालन किया जा सके और ठगी रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

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