नाबालिग की अश्लील तस्वीरें हटाने का आदेश: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- निजता पर गंभीर हमला”

Update: 2026-04-06 08:04 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मेटा प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से एक नाबालिग की अश्लील और निजी तस्वीरों को तुरंत हटवाए। अदालत ने कहा कि बिना सहमति इस तरह की सामग्री का प्रसार निजता और गरिमा पर गंभीर हमला है, जिसके दूरगामी और अपरिवर्तनीय परिणाम होते हैं।

जस्टिस फरजंद अली ने अपने फैसले में कहा कि डिजिटल युग में ऐसी सामग्री का प्रसार डिजिटल दाग बन जाता है, जो समय के साथ खत्म नहीं होता बल्कि पीड़ित को लगातार नुकसान पहुंचाता रहता है।

अदालत ने स्पष्ट किया,

“बिना सहमति निजी और अंतरंग सामग्री का प्रसार केवल कानूनी गलती नहीं बल्कि गरिमा पर गहरा आघात है जिसके परिणाम स्थायी और गंभीर होते हैं।”

मामले में नाबालिग के पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए बताया कि उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और आपत्तिजनक सामग्री लगातार सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है।

हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर भी कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत प्लेटफॉर्म को कुछ शर्तों के साथ सुरक्षा (सेफ हार्बर) मिलती है लेकिन यह पूर्ण नहीं है। जैसे ही किसी अवैध सामग्री की जानकारी मिलती है, प्लेटफॉर्म को तुरंत कार्रवाई करनी होती है।

अदालत ने कहा,

“कोई भी मध्यस्थ अवैध सामग्री की जानकारी मिलने के बाद मूक दर्शक नहीं बना रह सकता। देरी या लापरवाही उसकी कानूनी सुरक्षा खत्म कर सकती है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में निजता के अधिकार के साथ भूल जाने का अधिकार भी जुड़ा है, जिसके तहत व्यक्ति अपनी निजी जानकारी या सामग्री को हटाने की मांग कर सकता है।

अदालत ने माना कि इस तरह की घटनाएं न केवल मानसिक और भावनात्मक आघात पहुंचाती हैं बल्कि सामाजिक कलंक, अलगाव और पेशेवर नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा करती हैं।

\हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह तुरंत कार्रवाई करते हुए इंस्टाग्राम से संबंधित तस्वीरों को स्थायी रूप से हटवाए। साथ ही यदि संबंधित अकाउंट जिम्मेदार पाया जाए तो उसे निष्क्रिय कर स्थायी रूप से बंद किया जाए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आपत्तिजनक सामग्री हटाने के साथ-साथ संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है ताकि आपराधिक जांच में उनका उपयोग किया जा सके।

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