चोरी हुए मोबाइल के बाद दो साल से Google अकाउंट्स का एक्सेस नहीं, 19 वर्षीय छात्र की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का नोटिस
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने Google अकाउंट्स का एक्सेस वापस पाने के लिए एक 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए Google India और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अगस्त 2024 में मोबाइल फोन चोरी होने के बाद से वह अपने तीनों Google अकाउंट्स का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। उसने यह भी आरोप लगाया कि Google ने डेटा रिकवर करने में मदद देने के लिए ग्रिवांस अपीलेट कमेटी (GAC) द्वारा दिए गए आदेश का पालन नहीं किया।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करने के साथ-साथ अंतरिम राहत देने की मांग पर भी नोटिस जारी किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने Google India को भी नोटिस जारी किया और मामले को 20 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
मोबाइल चोरी होने के बाद तीनों अकाउंट्स का एक्सेस बंद
याचिका के अनुसार, छात्र का मोबाइल फोन 18 अगस्त 2024 को चोरी हो गया था। यही फोन उसके तीनों Google अकाउंट्स से जुड़ा एकमात्र भरोसेमंद डिवाइस था। फोन चोरी होने के बाद वह अपने तीनों अकाउंट्स से लॉक आउट हो गया।
छात्र का कहना है कि Google का अकाउंट रिकवरी सिस्टम उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को वेरिफाई तो करता है, लेकिन इसके बाद ऐसा कोड मांगता है जो केवल उन्हीं लॉक हो चुके अकाउंट्स पर भेजा जा सकता है। इस वजह से वह अकाउंट रिकवर नहीं कर पा रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस प्रक्रिया में मानवीय सत्यापन का कोई विकल्प भी उपलब्ध नहीं है।
GAC के आदेश के बाद भी मदद नहीं मिलने का आरोप
याचिकाकर्ता ने Google से शिकायत करने के अलावा RTI आवेदन और साइबर शिकायत भी दर्ज कराई। इसके बाद उसने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहले भी एक याचिका (CWP No. 25369 of 2026) दायर की थी।
13 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने उस याचिका का निपटारा करते हुए अपीलीय प्राधिकरण को सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत उसकी अपील पर 30 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया था।
इसके बाद 21 अगस्त 2026 को ग्रिवांस अपीलेट कमेटी (GAC) ने Google को छात्र के Gmail अकाउंट्स का डेटा रिकवर करने में मदद के लिए उचित मार्गदर्शन और सहायता देने का निर्देश दिया।
हालांकि, छात्र का आरोप है कि Google ने इस आदेश के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। उसने 9 सितंबर 2026 को भी ईमेल के जरिए संपर्क किया, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला।
डेटा डिलीट होने का खतरा
याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि Google की इनएक्टिव अकाउंट पॉलिसी के तहत उसके डेटा को डिलीट किया जा सकता है। उसके अनुसार, आखिरी बार अकाउंट एक्सेस करने की तारीख से दो साल की अवधि 18 अगस्त 2026 को पूरी हो चुकी है।
छात्र का कहना है कि उसके अकाउंट्स में मौजूद डेटा महत्वपूर्ण है और Google के पास इसे सुरक्षित रखने तथा रिकवर करने की तकनीकी क्षमता है। ऐसे में डेटा डिलीट होने की आशंका को देखते हुए तत्काल राहत जरूरी है।
डेटा प्रोटेक्शन कानून और अनुच्छेद 21 का हवाला
याचिका में छात्र ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि Google डेटा फिड्यूशियरी और वह स्वयं डेटा प्रिंसिपल है।
उसका दावा है कि कानून की धारा 2(u) के तहत व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच खोना भी 'पर्सनल डेटा ब्रीच' के दायरे में आ सकता है। उसने DPDP एक्ट की धारा 8(5) और DPDP रूल्स, 2025 के नियम 6(1)(d) का हवाला देते हुए कहा कि डेटा तक पहुंच खोने की स्थिति में भी उसका इस्तेमाल जारी रखने के लिए बैकअप जैसी उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि अधिनियम की धारा 27 डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड को सुधारात्मक उपायों के निर्देश देने की शक्ति प्रदान करती है। इसके अलावा, उसने IT Rules, 2021 के नियम 3(1)(m) और 3(1)(n) तथा संविधान के अनुच्छेद 21 का भी हवाला दिया है।
याचिका में आगे तर्क दिया गया है कि DPDP एक्ट की धारा 8(7) और 8(8), नियम 8 तथा DPDP रूल्स की थर्ड शेड्यूल के तहत डेटा प्रिंसिपल के अंतिम अनुरोध से तीन साल तक डेटा सुरक्षित रखने की जरूरत है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह अवधि Google की दो साल बाद डेटा डिलीट करने की नीति से अलग है।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने मामले में Google India और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।