पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई आरोपी ऐसी जगह की पहचान कराता है, जिसके बारे में पुलिस को पहले से ही किसी सह-आरोपी (Co-Accused) से जानकारी मिल चुकी थी, तो इसे एविडेंस एक्ट की धारा 27 के तहत कोई 'नई खोज' (Fact Discovered) नहीं माना जाएगा।

जस्टिस मनीषा बत्रा ने कहा,

"याचिकाकर्ता द्वारा छह महीने बाद उसी जगह की पहचान कराने से ऐसी कोई नई बात सामने नहीं आई, जो पुलिस को पहले से पता न हो। भले ही इस काम को एविडेंस एक्ट की धारा 8 के तहत 'आचरण' (Conduct) मान लिया जाए, फिर भी इससे केवल इतना ही पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने एक खास जगह की ओर इशारा किया है। इससे यह साबित नहीं होता कि उसके पास कोई प्रतिबंधित सामान (Contraband) था या उसने उसे बेचा है।"

यह टिप्पणी ट्रमाडोल (Tramadol) टैबलेट के कथित सप्लायर के खिलाफ चल रही NDPS कार्यवाही और उस पर तय किए गए आरोपों को रद्द करते समय की गई। कोर्ट ने पाया कि उसके अपने बयान और उससे जुड़े दस्तावेजों के अलावा, उसके खिलाफ एकमात्र सबूत एक सह-आरोपी का कबूलनामा था, जिसकी अब मौत हो चुकी है।

जनवरी 2021 में पुलिस ने मोटरसाइकिल पर जा रहे तीन युवकों को रोका और उनके पास से 2,700 ट्रमाडोल टैबलेट बरामद कीं। उन्होंने कथित तौर पर याचिकाकर्ता का नाम सप्लायर के रूप में लिया, जिसके बाद NDPS Act की धारा 22(c) के तहत FIR दर्ज की गई। उनमें से एक ने अपना बयान दिया और उस जगह की पहचान कराई, जहां से टैबलेट खरीदी गई थीं।

बाकी दो युवक नाबालिग (Juvenile) पाए गए, और उनके मामले को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (Juvenile Justice Board) के पास भेज दिया गया। बयान देने वाले सह-आरोपी की बाद में मौत हो गई, जिससे उसके खिलाफ चल रही कार्यवाही खत्म हो गई।

अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) मिलने के बाद याचिकाकर्ता जुलाई 2021 में जांच में शामिल हुआ। उसने कथित तौर पर अपना बयान देते हुए बिक्री की बात कबूली, बिक्री वाली जगह की पहचान कराई और बिक्री से बची हुई रकम के तौर पर 1,500 रुपये पेश किए। जनवरी 2024 में उसके खिलाफ आरोप तय किए गए, और अब तक अभियोजन पक्ष के 18 गवाहों में से 5 से पूछताछ हो चुकी है।

उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए याचिका स्वीकार कर ली गई।

Case Title : Harpreet Singh v. State of Haryana

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: