पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने पंजाब सरकार से न्यायालय को यह बताने के लिए कहा कि जब घायल प्रदर्शनकारी ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि उसे पंजाब के क्षेत्र से उठाया गया और हरियाणा के क्षेत्र में ले जाया गया, जहां हरियाणा पुलिस ने उसे बेरहमी से पीटा, तो घटना पर जीरो एफआईआर क्यों दर्ज की गई।

प्रदर्शनकारी प्रीतपाल सिंह के पिता ने हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की। उक्त याचिका में आरोप लगाया गया कि हरियाणा पुलिस ने उनके बेटे को 21 फरवरी को शांतिपूर्ण किसान आंदोलन का हिस्सा होने के कारण पंजाब की सीमाओं के भीतर से उठाया।

हरियाणा सरकार द्वारा इन आरोपों का खंडन करते हुए हलफनामा दायर किया गया। इसमें दावा किया गया कि युवक दोनों राज्यों की सीमाओं पर लगाए गए बैरिकेड्स से सटे खेतों में गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया गया था और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

हालांकि सीजेएम (14 मार्च को) द्वारा दर्ज किए गए बयान में प्रीतपाल ने आरोप लगाया कि उसे हरियाणा पुलिस द्वारा पंजाब के संगरूर जिले से जबरन हरियाणा की ओर ले जाया गया और बेरहमी से पीटा गया।

पिछले आदेश के अनुपालन में पंजाब सरकार ने प्रस्तुत किया कि प्रीतपाल के बयान के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कथित घटना पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई।

जस्टिस हरकेश मनुजा ने उल्लेख किया कि पंजाब पुलिस ने वर्तमान सुनवाई में प्रस्तुत किया कि संबंधित एफआईआर घायलों के मेडिकल रिकॉर्ड से परामर्श किए बिना दर्ज की गई, क्योंकि वे उनके पास उपलब्ध नहीं है।

परिणामस्वरूप न्यायालय ने कहा,

"एएजी पंजाब को घायल-प्रीतपाल सिंह का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड जांच एजेंसी को उपलब्ध कराने के संबंध में विशिष्ट निर्देश प्राप्त करने चाहिए तथा न्यायालय को यह भी अवगत कराना चाहिए कि जब संबंधित अधिकारी ने उपरोक्त एफआईआर दर्ज करते समय घायल के बयान के आधार पर यह माना कि संज्ञेय अपराध बनता है तो घटना के संबंध में जीरो एफआईआर क्यों दर्ज की गई। खासकर तब जब घायल ने 14.03.2024 को दिए गए अपने बयान में विशेष रूप से आरोप लगाया कि उसे पंजाब के क्षेत्र से उठाकर हरियाणा के क्षेत्र में ले जाया गया, जहां उसे बेरहमी से पीटा गया।"

मामले को आगे के विचार के लिए 09 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया गया।

केस टाइटल- दविंदर सिंह बनाम हरियाणा राज्य और अन्य

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