शौर्य चक्र सम्मानित बलविंदर सिंह संधू हत्याकांड: NIA मामले में आरोपी को जमानत देने से हाईकोर्ट का इनकार

Update: 2026-06-25 09:59 GMT

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शौर्य चक्र सम्मानित कॉमरेड बलविंदर सिंह संधू की हत्या से जुड़े NIA मामले में आरोपी गुरविंदर सिंह उर्फ बाबा की नियमित जमानत याचिका खारिज की।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपी की आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता की ओर संकेत करती है।

जस्टिस अर्चना पुरी और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह प्रतीत होता है कि आरोपी का झुकाव आतंकवाद की ओर था।

अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43-डी(5) के कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं, इसलिए जमानत देने का आधार नहीं बनता।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जांच के दौरान एकत्र सामग्री आरोपी की आतंकवादी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में कथित भूमिका दर्शाती है, जिन्हें प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों का समर्थन प्राप्त था।

अदालत ने माना कि मामले में देश की सुरक्षा और अखंडता से जुड़े गंभीर आरोप हैं।

यह मामला पंजाब के तरनतारन जिले में दर्ज FIR से जुड़ा है। बलविंदर सिंह संधू की उनके घर और स्कूल परिसर में दो अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

प्रारंभ में भारतीय दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

बाद में मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं। अपराध की गंभीरता और कथित आतंकवादी संबंधों को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह हत्या एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थी, जिसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के सदस्यों ने अंजाम दिया।

जांच में सामने आया कि कई कथित साजिशकर्ताओं ने हत्या की योजना को सफल बनाने के लिए वित्तीय, रसद और अन्य प्रकार का सहयोग उपलब्ध कराया।

NIA का आरोप है कि गुरविंदर सिंह उर्फ बाबा प्रमुख साजिशकर्ताओं का करीबी सहयोगी था और उसने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोलाबारूद की व्यवस्था करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि वह सह-आरोपियों के साथ हथियारों की तस्वीरें साझा करता था तथा मादक पदार्थों की तस्करी और धन के लेन-देन में भी शामिल था।

अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी लगभग दो वर्षों तक गिरफ्तारी से बचता रहा। उसकी तलाश के लिए लुकआउट सर्कुलर जारी करना पड़ा, जिसके बाद 25 अगस्त 2022 को उसे गिरफ्तार किया गया।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने लंबी न्यायिक हिरासत और मुकदमे में देरी का हवाला देते हुए जमानत की मांग की। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने कहा कि इतने गंभीर अपराधों में केवल मुकदमे में देरी को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता। विशेष रूप से तब, जब विशेष NIA अदालत के माध्यम से मुकदमे को जल्द गति देने की प्रक्रिया चल रही हो।

अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबी हिरासत अपने आप में जमानत का अधिकार प्रदान नहीं करती।

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने गुरविंदर सिंह उर्फ बाबा की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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