पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि 'फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999' (FEMA) के तहत तलाशी ले रहा प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी स्थानीय पुलिस को यह बता सकता है कि कोई संज्ञेय अपराध हुआ है। अधिकारी ऐसा तब भी कर सकता है, भले ही FEMA में 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002' (PMLA) की धारा 66 जैसा कोई प्रावधान न हो।

कोर्ट ने माना कि ऐसी सूचना के आधार पर दर्ज की गई FIR, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 'प्रेडिकेट ऑफेंस' (मूल अपराध) के तौर पर मान्य हो सकती है।

जस्टिस कुलदीप तिवारी ने कहा,

"हालांकि FEMA, 1999 में PMLA, 2002 की धारा 66 जैसा कोई विशेष प्रावधान नहीं है, लेकिन यह स्थानीय पुलिस के साथ संज्ञेय अपराध की जानकारी साझा करने पर कोई रोक भी नहीं लगाता है। वास्तव में, किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी देने के लिए किसी कानूनी प्रावधान (Statutory Backing) की जरूरत नहीं होती है।"

कोर्ट ने यह टिप्पणी M/s हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए की।

बता दें, ED ने उन्हें 9 मई, 2026 को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने UAE की दो कंपनियों को 102.50 करोड़ रुपये कीमत के आईफोन (iPhones) का फर्जी निर्यात (Fictitious Exports) किया था।

Case Title : Sanjeev Arora v. ED

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