छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा गैर-कानूनी हिरासत और मारपीट का आरोप: पटना हाईकोर्ट पहुंचा वकील
पटना हाईकोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर की। उनका आरोप है कि पटना के गांधी मैदान के पास विरोध कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के दौरान जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से संयम बरतने का अनुरोध किया, तो उन्हें गैर-कानूनी तरीके से पकड़ा गया, उनके साथ मारपीट की गई और लगभग 31 घंटे तक हिरासत में रखा गया।
याचिकाकर्ता आदिल हुसैन ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (आदेश) की मांग की है ताकि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जा सके। साथ ही उन्होंने जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने, घटना का CCTV फुटेज सुरक्षित रखने, संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने और अनुच्छेद 21 और 22 के तहत अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए मुआवज़ा देने की भी मांग की।
इस मामले में प्रतिवादियों में बिहार सरकार, पुलिस महानिदेशक (DGP), पुलिस अधीक्षक (पूर्वी पटना) और स्टेशन हाउस ऑफिसर (कोतवाली पुलिस स्टेशन और राजीव नगर पुलिस स्टेशन) शामिल हैं।
याचिका के अनुसार, 25.07.2026 को सिविल कोर्ट से अपने चैंबर लौटते समय याचिकाकर्ता ने पुलिसकर्मियों को छात्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते देखा। कुछ छात्रों के संपर्क करने पर याचिकाकर्ता ने खुद को वकील बताया और पुलिसकर्मियों से संयम बरतने की अपील की। हालांकि, पुलिसकर्मियों ने याचिकाकर्ता को पकड़ लिया, उनका कॉलर पकड़ा, उनके कपड़े फाड़ दिए, उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट की।
आगे यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता को कोतवाली पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्होंने हिरासत में लिए गए छात्रों के साथ पुलिस की हिंसा देखी। आपत्ति जताने पर वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा कि वे "वकीलों की सीमाएं जानें।"
बाद में याचिकाकर्ता को राजीव नगर पुलिस स्टेशन भेज दिया गया।
आरोप है कि याचिकाकर्ता लगभग 30 घंटे और 50 मिनट तक हिरासत में रहे, लेकिन उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया और न ही उनके खिलाफ कोई FIR दर्ज की गई। इसके अलावा, उनकी हिरासत के बारे में उनके परिवार या दोस्तों को कोई सूचना नहीं दी गई।
ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के मामलों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने FIR दर्ज करने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किए जाने तथा हिरासत में हुए उल्लंघन के लिए मुआवज़ा देने का निर्देश मांगा है। एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच, CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और उसे पेश करने की मांग की गई। साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने की भी मांग की गई।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वकील मासूम रज़ा कर रहे हैं।
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