मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में इन-सर्विस (पहले से नौकरी कर रहे) उम्मीदवारों का एडमिशन, मौजूदा सीट वितरण व्यवस्था के तहत उनके लिए आरक्षित 30% सीटों तक ही सीमित रखा जाए।

चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने कहा:

"इस मामले की तात्कालिकता और सीटों के आवंटन की चल रही प्रक्रिया को देखते हुए कोर्ट यह निर्देश देना उचित समझता है कि प्रतिवादी (राज्य सरकार) यह सुनिश्चित करें कि इन-सर्विस उम्मीदवारों को ब्रांच/विषय का आवंटन, मध्य प्रदेश के सरकारी और स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों में PG डिग्री (MD/MS) सीटों के लिए तय 30% कोटे के भीतर ही हो (NEET PG-2026-2 के अनुसार)।"

याचिकाकर्ता फ्रेश (गैर-नौकरीपेशा) उम्मीदवार हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन-सर्विस उम्मीदवारों को NEET PG स्कोर में 'सर्विस-आधारित इंसेंटिव मार्क्स' (अतिरिक्त अंक) देने से उनकी मेरिट स्थिति कृत्रिम रूप से बेहतर हो जाती है। इससे फ्रेश उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होते हैं, भले ही उनके NEET PG स्कोर अधिक क्यों न हों।

याचिका के अनुसार, 'एमपी चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम, 2018' के नियम 14 के तहत, इन-सर्विस उम्मीदवारों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर 'इंसेंटिव वेटेज' (अतिरिक्त अंक) पाने का अधिकार है।

याचिका में कहा गया कि इस वेटेज के कारण इन-सर्विस उम्मीदवारों के स्कोर, फ्रेश उम्मीदवारों की तुलना में बढ़ जाते हैं, जिससे उन्हें 30% कोटे के अलावा भी एक अतिरिक्त लाभ मिल जाता है।

इस असमानता को समझाने के लिए याचिका में एक उदाहरण दिया गया: एक इन-सर्विस उम्मीदवार, जिसकी AIR (ऑल इंडिया रैंक) 13865 थी, अतिरिक्त इंसेंटिव मार्क्स मिलने के बाद मेरिट सूची में 333वें स्थान पर आ गया। बताया गया कि इस तरह ऐसे उम्मीदवार अपनी पसंद की पोस्टग्रेजुएट स्पेशलिटी चुनने की स्थिति में आ जाते हैं, जबकि उनसे अधिक अंक लाने वाले फ्रेश उम्मीदवार पीछे रह जाते हैं।

याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई यह प्रक्रिया 2018 के प्रवेश नियमों के खिलाफ है और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है।

इस दलील पर ध्यान देते हुए बेंच ने टिप्पणी की:

"ऐसा लगता है कि कोर्स में छात्रों को दाखिला देने के लिए प्रतिवादी/निदेशक ने जो तरीका अपनाया है, उससे सेवारत (in-service) उम्मीदवारों को दोहरा लाभ मिल रहा है। उन्हें 30% आरक्षण कोटे का लाभ भी मिल रहा है और अपने अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक भी दिए जा रहे हैं। इससे उन नए छात्रों के साथ भारी अन्याय हो रहा है, जिनका NEET PG स्कोर अधिक है।"

इस प्रकार, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को प्रतिवादियों को नोटिस भेजने (ईमेल के माध्यम से भी) की अनुमति दी और सभी पक्षों को अपनी दलीलें (Pleadings) पूरी करने का निर्देश दिया।

इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर, 2020 को दोपहर 2:30 बजे होगी।

Case Title : Sarvjeet Singh v State of MP

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