सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला: CRPF जवान को जमानत, 15 लाख रुपये जमा कराने का आदेश

Update: 2026-06-24 10:50 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूलने के आरोप में गिरफ्तार CRPF जवान और उसके कथित सहयोगी को जमानत दी।

अदालत ने जमानत देते हुए CRPF जवान को ट्रायल कोर्ट में 15 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश भी दिया।

जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर की पीठ ने कहा कि आरोपियों के न्याय से भागने की संभावना नहीं है। उनके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास भी सामने नहीं आया है। ऐसे में उन्हें लगातार जेल में रखने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता।

अदालत ने अपने आदेश में कहा,

“न्याय से फरार होने की कोई संभावना प्रतीत नहीं होती। आपराधिक पृष्ठभूमि के अभाव और आवेदकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनके दोबारा अपराध करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी नहीं है। इसलिए उन्हें निरंतर हिरासत में रखने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता।”

मामले में जमानत याचिका दो आरोपियों की ओर से दायर की गई। इनमें एक CRPF का जवान है, जिस पर अभ्यर्थियों से धनराशि लेने का आरोप है, जबकि दूसरा एक निजी व्यक्ति है, जिस पर बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया। दोनों 16 मार्च 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं।

आवेदकों की ओर से दलील दी गई कि वे स्वयं मुख्य आरोपी अच्युतानंद आजाद की धोखाधड़ी का शिकार हुए। CRPF जवान का कहना था कि उसे सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से रकम एकत्र कर मुख्य आरोपी तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।

जवान ने अदालत को बताया कि जब उसने मुख्य आरोपी से धनराशि वापस मांगी तो उसे इस मामले में झूठा फंसाने की धमकी दी गई। इसके बाद उसने भोपाल स्थित CRPF के उप महानिरीक्षक को लिखित शिकायत भी दी।

दूसरे आरोपी की ओर से कहा गया कि उसके बैंक खाते में कोई धनराशि नहीं आई और न ही उसने किसी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे देने के लिए प्रेरित किया। दोनों आरोपियों ने अपनी सद्भावना दिखाने के लिए ट्रायल कोर्ट में 15 लाख रुपये जमा कराने की पेशकश भी की।

बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि मामले के मुख्य आरोपी अच्युतानंद आजाद को पहले ही हाईकोर्ट की समन्वय पीठ से जमानत मिल चुकी है।

वहीं, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

एजेंसी के अनुसार कम-से-कम 21 अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगा गया।

CBI ने यह भी कहा कि मुख्य आरोपी को उसकी बेटी की गंभीर बीमारी के कारण जमानत मिली थी।

अदालत ने माना कि जांच पूरी हो चुकी है और अंतिम प्रतिवेदन दाखिल किया जा चुका है। साथ ही यह भी कहा कि अभियोजन के आरोपों की सत्यता का परीक्षण ट्रायल के दौरान होगा। हालांकि, अदालत ने यह भी पाया कि आवेदकों की दलीलों को पूरी तरह निराधार नहीं कहा जा सकता।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी। साथ ही CRPF जवान को ट्रायल कोर्ट में 15 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया।

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