अपील बहाल करते हुए अनोखा निर्देश: वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं, रिपोर्ट भी दें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-07-16 12:20 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक रिट अपील बहाल करते हुए आवेदक को अनोखा निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि वह जबलपुर के तिलवारा वृद्धाश्रम जाकर वहां के बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं और 15 दिनों के भीतर अपने अनुभव, वृद्धाश्रम की स्थिति तथा सुझावों सहित रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला "सामाजिक लेखा-परीक्षण" की अवधारणा को परखने का अवसर है और वर्तमान समय में इसकी अत्यंत आवश्यकता है।

मामला उस रिट अपील से जुड़ा था जिसे 18 जुलाई 2025 को पारित एक आदेश के कारण खारिज कर दिया गया। आवेदक ने अपील बहाल करने के लिए आवेदन दायर करते हुए कहा कि अपील का निरस्त होना जानबूझकर नहीं था, बल्कि उसके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण ऐसा हुआ। इसलिए केवल प्रक्रियागत कारणों से उसे नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने आवेदक का पक्ष स्वीकार करते हुए कहा कि उसका आग्रह वास्तविक और सद्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। अदालत ने दोहराया कि अधिवक्ता की त्रुटि का खामियाजा वादकारी को नहीं भुगतना चाहिए इसलिए अपील बहाल किए जाने योग्य है।

सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने सुझाव दिया कि लागत लगाने के बजाय वह दो हजार रुपये के फल, नाश्ता या अन्य खाद्य सामग्री लेकर तिलवारा वृद्धाश्रम जाएं और वहां के बुजुर्गों के साथ समय बिताएं। अदालत ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए इसे दंडात्मक नहीं, बल्कि समाजोपयोगी कदम बताया।

कोर्ट ने कहा,

"एक घंटे की यह सामुदायिक सेवा न केवल आत्मिक संतोष देगी, बल्कि इन संस्थानों में रहने वाले लोगों को यह संदेश भी देगी कि समाज उनकी परवाह करता है और उन्हें अकेला नहीं छोड़ा गया।"

खंडपीठ ने कहा कि प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, विधि और अन्य क्षेत्रों से जुड़े जिम्मेदार एवं सक्षम लोगों, जैसे चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, अधिवक्ता तथा अन्य पेशेवरों को समय-समय पर वृद्धाश्रम, अनाथालय, आश्रय गृह और अन्य संस्थानों का दौरा करना चाहिए। इससे एक ओर उन्हें वहां रहने वाले लोगों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा, वहीं दूसरी ओर इन संस्थानों में रहने वाले लोगों को यह एहसास होगा कि समाज उनके साथ खड़ा है।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे दौरे संस्थानों के प्रबंधन पर भी सकारात्मक निगरानी का काम करेंगे और वे बच्चों, महिलाओं तथा अन्य निवासियों के साथ किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार से बचेंगे।

इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने आवेदक की अपील बहाल करते हुए निर्देश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर तिलवारा वृद्धाश्रम के दौरे की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे।

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