धारा 41A CrPC के नोटिस का पालन होने पर सामान्यतः गिरफ्तारी नहीं: पुलिस कांस्टेबल भर्ती घोटाले में आरोपी को अग्रिम जमानत—मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित धांधली मामले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की है। आरोपी पर अभ्यर्थियों और प्रतिरूप (इम्पर्सोनेटर) व्यक्तियों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाकर अवैध चयन में सहायता करने का आरोप था।
जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि धारा 41A CrPC (अब BNSS की धारा 35(3)) के तहत जारी नोटिस का पालन करने पर सामान्यतः गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जांच में सहयोग करता है, तो उसे गिरफ्तार करना तभी संभव है जब वह नोटिस का पालन न करे या जांच अधिकारी के पास गिरफ्तारी के लिए नए ठोस कारण हों।
यह मामला भोपाल स्थित साइबर एवं हाईटेक क्राइम शाखा में दर्ज एफआईआर से संबंधित है, जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन के अनुसार, सह-आरोपी अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठते थे, जबकि वास्तविक अभ्यर्थी शारीरिक परीक्षा में शामिल होकर चयनित हो जाते थे। दस्तावेज सत्यापन के दौरान आधार कार्ड में संदिग्ध बदलाव सामने आने पर मामला दर्ज किया गया।
जांच में यह सामने आया कि कुछ आधार ऑपरेटरों ने नियमों का उल्लंघन किया और आरोपी बिचौलिये के रूप में कार्य कर रहा था, जो अभ्यर्थियों और इम्पर्सोनेटर के बीच संपर्क स्थापित करता था।
आरोपी की ओर से यह दलील दी गई कि एक ही घटना पर दो एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि राज्य ने कहा कि कुछ धाराएं पहले दर्ज नहीं की गई थीं।
अदालत ने पाया कि आरोपी स्वयं चयनित अभ्यर्थी नहीं था, बल्कि केवल बिचौलिये की भूमिका में था। साथ ही, जांच अधिकारी द्वारा धारा 41A का नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिए कहा गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तत्काल गिरफ्तारी की मंशा नहीं थी।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने यह कहते हुए अग्रिम जमानत मंजूर कर ली कि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है और उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, हालांकि जमानत कुछ शर्तों के अधीन दी गई है।