प्राचीन विष्णु वराह मंदिर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तीन महीने में पूरी करे सरकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर जिले के मझौली स्थित प्राचीन श्री विष्णु वराह मंदिर के आसपास कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जल्द पूरी करने का निर्देश राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही यथाशीघ्र पूरी की जाए और इसके लिए तीन महीने की समय-सीमा तय की जाती है।
चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने मंदिर के संरक्षण और सुरक्षा की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया गया है। चूंकि यह विवाद कई वर्षों से चल रहा है, इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही यथासंभव तीन महीने के भीतर पूरी करें।
इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर की वर्तमान स्थिति के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिका में बताया गया कि श्री विष्णु वराह मंदिर को राज्य सरकार ने 14 अगस्त 1981 को जारी अधिसूचना के माध्यम से प्राचीन स्मारक घोषित करते हुए संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया था।
याचिका के अनुसार, प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के तहत संरक्षित स्मारक को नुकसान पहुंचाने, उसमें बदलाव करने, उसे विकृत करने या उसके दुरुपयोग पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
याचिका में यह भी कहा गया कि मंदिर के आसपास 100 मीटर का क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र और 100 से 200 मीटर तक का क्षेत्र विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया। इस प्रकार मंदिर के आसपास 300 मीटर के दायरे में निर्माण, खनन और कृषि संबंधी गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू है।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि कथित अतिक्रमणकारियों को बेदखली के नोटिस जारी किए गए। हालांकि, इनमें से एक व्यक्ति ने दीवानी अदालत का रुख किया था। दीवानी अदालत ने उसका मुकदमा खारिज कर दिया था और अतिक्रमण को लेकर कुछ टिप्पणियां भी की थीं।
याचिका में आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद पुलिस और राज्य के संबंधित अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
याचिकाकर्ता ने तस्वीरों के माध्यम से यह भी दिखाने का प्रयास किया कि प्रतिबंधित और विनियमित क्षेत्रों में अवैध दुकानें संचालित की जा रही हैं।
अंततः हाईकोर्ट ने अधिकारियों को तीन महीने के भीतर बेदखली की कार्यवाही पूरी करने का निर्देश देते हुए जनहित याचिका का निपटारा किया।