कोर्ट्स में सर्विस मैटर्स की बाढ़: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य को इन-हाउस कर्मचारी विवाद समाधान प्रणाली बनाने का सुझाव दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी) को राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों की शिकायतों को आंतरिक रूप से हल करने के लिए एक विवाद समाधान प्रणाली स्थापित करने का सुझाव दिया।
जस्टिस विनय सर्राफ की बेंच ने देखा कि हाई कोर्ट्स में सर्विस मैटर्स की बाढ़ आ गई है, जिन्हें शुरुआती चरण में ही हल किया जा सकता था।
बेंच ने कहा;
"मैंने राज्य सरकार को यह सुझाव देना उचित समझा कि वह राज्य सरकार के कर्मचारियों के विवादों या शिकायतों को शुरुआती चरण में ही तय करने के लिए नीति बनाए ताकि मामलों की संख्या न बढ़े। इसके लिए राज्य सरकार हर विभाग के हर स्तर के कार्यालय में एक अधिकारी को कर्मचारियों की शिकायतों को सुनने और तय करने का अधिकार दे सकती है।"
यह याचिका याचिकाकर्ताओं को 1 सितंबर, 2010 से अलग-अलग वेतन के साथ वरिष्ठता देने के निर्देश देने की मांग करते हुए दायर की गई।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने 16 अप्रैल, 2024 के नंद किशोर पटेल बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले पर भरोसा किया, जिसमें कोऑर्डिनेट बेंच ने समान परिस्थितियों में याचिका स्वीकार कर ली थी और राज्य को वरिष्ठता और वेतन का अंतर देने का निर्देश दिया था।
वर्तमान याचिका को 30 दिनों के भीतर विभाग के सक्षम अधिकारी के सामने प्रतिनिधित्व करने की स्वतंत्रता के साथ निपटा दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि कई राज्य सरकार के कर्मचारियों को हाईकोर्ट का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे हाई कोर्ट में सर्विस मैटर्स की बाढ़ आ जाती है, जिसे टाला जा सकता है।
स्थानांतरण, वेतनमान, वेतन वृद्धि, पदोन्नति, वरिष्ठता, नियमितीकरण, वर्गीकरण, निलंबन, बर्खास्तगी सहित इन मामलों को शुरुआती चरण में ही तय किया जा सकता है।
बेंच ने आगे कहा कि राज्य सरकार इन मामलों का बचाव करने में बहुत पैसा खर्च करती है।
इसलिए कोर्ट ने राज्य सरकार को नियमों, नीतियों, सर्कुलर और योजनाओं के अनुसार एक विवाद समाधान प्रणाली स्थापित करने का सुझाव दिया।
यह प्रणाली राज्य को कर्मचारी और अधिकृत अधिकारी के बीच सीधी चर्चा करके अधिक लचीलेपन के साथ मुद्दों को निपटाने की अनुमति देगी।
Case Title: Chaukhi Lal Yadav v State of MP (WP 1733/2026)