भोजशाला मंदिर-कमल मौला विवाद: सर्वे का वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करे अपलोड, ताकि याचिकाकर्ता देख सकें: हाईकोर्ट ने ASI को निर्देश

Update: 2026-04-23 14:05 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया कि वह साइट सर्वे के वीडियोग्राफिक रिकॉर्ड को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करे और मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी को उसका एक्सेस (पहुंच) प्रदान करे।

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया:

"सुप्रीम कोर्ट के 01.04.2026 के आदेश के पैरा 6 में की गई टिप्पणियों को देखते हुए हम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को निर्देश देते हैं कि वह भोजशाला साइट पर की गई सर्वे की कार्यवाही की वीडियोग्राफी को एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म, जैसे कि Google Drive लिंक या किसी अन्य समान क्लाउड-आधारित सेवा पर अपलोड करे और प्रतिवादी नंबर 8 के वकील तथा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच को उसका एक्सेस प्रदान करे। चूंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के आलोक में सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर चल रही है, इसलिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यह सुनिश्चित करेगा कि उक्त वीडियोग्राफी को Google Drive लिंक पर अपलोड करने का कार्य 27.4.2026 तक सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा कर लिया जाए।"

बता दें, यह विवाद भोजशाला से संबंधित है, जो धार में स्थित 11वीं सदी का एक स्मारक है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। इस स्थल का हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों के लिए धार्मिक महत्व है।

उपर्युक्त निर्देश तब दिए गए, जब हाईकोर्ट प्रतिवादी नंबर 8 मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई कर रहा था। इस आवेदन में सोसाइटी ने ASI सर्वे के वीडियोग्राफिक रिकॉर्ड तक पहुंच की मांग की थी।

सोसाइटी की ओर से पेश होते हुए सीनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने 1 अप्रैल, 2026 को एक संबंधित अपील में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला दिया। उस आदेश में कहा गया कि वीडियोग्राफी के संबंध में उठाई गई आपत्तियों पर भी हाईकोर्ट द्वारा 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' के अनुरूप विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि ASI की रिपोर्ट पर प्रभावी ढंग से आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस फुटेज तक पहुंच होना अत्यंत आवश्यक है।

ASI ने इस अनुरोध का विरोध करते हुए तर्क दिया कि सर्वे की वीडियोग्राफी लगभग 96 दिनों तक चली है और इतनी विशाल सामग्री को प्रदर्शित करने में काफी समय लगेगा। उसने यह भी दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश केवल इस हद तक सीमित था कि हाईकोर्ट स्वयं उस फुटेज का अवलोकन (जांच) कर सके।

उक्त दलील खारिज करते हुए अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने वीडियोग्राफिक रिकॉर्ड से जुड़ी आपत्तियों पर विचार करने की बात साफ़ तौर पर कही थी। इसलिए अदालत ने ASI को निर्देश दिया कि वह 27 अप्रैल, 2026 तक प्राथमिकता के आधार पर अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी करे।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया,

"इस अदालत द्वारा पारित इस आदेश की एक प्रति ASI के वकील द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के महानिदेशक (प्रतिवादी संख्या 2) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल मंडल, भोपाल के अधीक्षक (प्रतिवादी नंबर 3) को आज ही भेजी जाएगी।"

पिछली सुनवाई में अदालत ने सोमवार, 6 अप्रैल से इस मामले की सुनवाई रोज़ाना करने का फ़ैसला किया।

Case Title: Hindu Front For Justice v Union of India [WP - 10497/2022 (PIL)]

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