दंडित व्यक्ति को निर्णय की प्रति देने का अधिकार: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 404

न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में पारदर्शिता (Transparency) और न्याय के अधिकार (Right to Justice) को सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि अभियुक्त (Accused) को उसके खिलाफ दिए गए निर्णय (Judgment) की जानकारी पूरी तरह से उपलब्ध कराई जाए।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 404 यह प्रावधान करती है कि यदि किसी अभियुक्त को कारावास (Imprisonment) या मृत्युदंड (Death Sentence) दिया जाता है, तो उसे न्यायालय द्वारा पारित निर्णय की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) तुरंत और मुफ्त में प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, यदि अभियुक्त अनुरोध करता है, तो उसे उसकी अपनी भाषा में (यदि व्यावहारिक हो) या न्यायालय की भाषा में निर्णय का अनुवाद (Translation) भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
यह धारा यह भी सुनिश्चित करती है कि अपील (Appeal) योग्य निर्णयों की प्रति अभियुक्त को मुफ्त में मिले, और न्यायालय अभियुक्त को यह भी बताए कि वह कितने समय में अपील दायर कर सकता है।
अभियुक्त को मुफ्त में निर्णय की प्रति देने का प्रावधान (Section 404(1))
निर्णय सुनाए जाने के तुरंत बाद प्रति देने का अधिकार
जब किसी अभियुक्त को सजा सुनाई जाती है और वह कारावास (Imprisonment) का सामना करता है, तो न्यायालय को यह सुनिश्चित करना होता है कि निर्णय की एक प्रमाणित प्रति तुरंत और मुफ्त में अभियुक्त को प्रदान की जाए।
उदाहरण:
1. यदि किसी व्यक्ति को चोरी के अपराध में तीन साल की सजा दी जाती है, तो उसे न्यायालय द्वारा पारित निर्णय की एक प्रति दी जाएगी।
2. यदि किसी व्यक्ति को हत्या के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है, तो उसे भी निर्णय की एक प्रति मुफ्त में दी जाएगी।
अनुरोध पर निर्णय की प्रमाणित प्रति और अनुवाद देने का अधिकार (Section 404(2))
निर्णय की प्रमाणित प्रति मुफ्त में देने का प्रावधान
• यदि अभियुक्त न्यायालय से अनुरोध करता है, तो उसे निर्णय की एक प्रमाणित प्रति (Certified Copy) या उसकी भाषा में अनुवाद (Translation) बिना देरी के उपलब्ध कराया जाएगा।
• यदि निर्णय अपील योग्य (Appealable) है, तो अभियुक्त को यह प्रति मुफ्त में दी जाएगी, चाहे वह इसकी मांग करे या न करे।
भाषा के संबंध में महत्वपूर्ण प्रावधान
• न्यायालय, यदि संभव हो, तो निर्णय का अनुवाद अभियुक्त की अपनी भाषा में प्रदान करेगा।
• यदि अभियुक्त की भाषा में अनुवाद संभव नहीं है, तो निर्णय की प्रति न्यायालय की आधिकारिक भाषा (Court Language) में दी जाएगी।
उदाहरण:
1. एक तमिल भाषी व्यक्ति को उत्तर प्रदेश में अपराध के लिए दंडित किया गया है। यदि वह अनुरोध करता है, तो उसे निर्णय का अनुवाद तमिल में दिया जाएगा, यदि व्यावहारिक हो।
2. एक मराठी भाषी व्यक्ति को दिल्ली में दंडित किया गया है, लेकिन मराठी अनुवाद उपलब्ध नहीं है, तो उसे निर्णय हिंदी या अंग्रेज़ी में दिया जाएगा।
मृत्युदंड की सजा वाले मामलों में विशेष प्रावधान (Section 404(2) और (4))
• यदि हाई कोर्ट (High Court) किसी अभियुक्त को मृत्युदंड (Death Sentence) देता है या उसकी सजा की पुष्टि (Confirmation) करता है, तो निर्णय की प्रमाणित प्रति अभियुक्त को तुरंत और मुफ्त में दी जाएगी, भले ही उसने इसके लिए अनुरोध न किया हो।
• यदि अभियुक्त को मृत्युदंड की सजा मिली है और उसे अपील (Appeal) करने का अधिकार है, तो न्यायालय उसे बताएगा कि वह कितने समय में अपील दायर कर सकता है।
उदाहरण:
1. एक अभियुक्त को हत्या के मामले में मृत्युदंड दिया गया। हाई कोर्ट ने इस सजा की पुष्टि की। इस स्थिति में, अभियुक्त को निर्णय की प्रमाणित प्रति स्वतः ही मुफ्त में दी जाएगी।
2. यदि अभियुक्त को अपनी सजा के खिलाफ अपील करने का अधिकार है, तो न्यायालय उसे सूचित करेगा कि वह कितने दिनों के भीतर अपील दायर कर सकता है।
अन्य प्रभावित व्यक्तियों को निर्णय की प्रति देने का प्रावधान (Section 404(5))
यदि कोई अन्य व्यक्ति, जो न्यायालय के निर्णय या आदेश से प्रभावित हुआ है, निर्णय की प्रति चाहता है, तो वह न्यायालय में आवेदन कर सकता है और निर्धारित शुल्क (Prescribed Charges) का भुगतान करके इसे प्राप्त कर सकता है।
हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में, न्यायालय शुल्क माफ कर सकता है और प्रभावित व्यक्ति को निर्णय की प्रति मुफ्त में भी दे सकता है।
सरकारी अभियोजन अधिकारी (Prosecuting Officer) के लिए विशेष प्रावधान
• यदि सरकारी अभियोजन अधिकारी (Prosecuting Officer) अनुरोध करता है, तो सरकार को मुफ्त में निर्णय की प्रमाणित प्रति प्रदान की जा सकती है।
उदाहरण:
1. एक व्यक्ति को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया, और उसका परिवार न्यायालय के निर्णय की प्रति प्राप्त करना चाहता है। वे शुल्क देकर इसे प्राप्त कर सकते हैं।
2. यदि अभियोजन अधिकारी चाहता है कि सरकार को निर्णय की प्रति उपलब्ध कराई जाए, तो यह मुफ्त में दी जा सकती है।
उच्च न्यायालय द्वारा अन्य व्यक्तियों को निर्णय की प्रति देने का प्रावधान (Section 404(6))
यदि कोई व्यक्ति न्यायालय के निर्णय से प्रभावित नहीं है, लेकिन फिर भी उसकी प्रति प्राप्त करना चाहता है, तो उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार, वह शुल्क देकर इसे प्राप्त कर सकता है।
शर्तें (Conditions for Obtaining a Copy)
• ऐसे व्यक्ति को निर्णय की प्रति तभी मिलेगी जब वह उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों (Conditions) को पूरा करता हो।
• शुल्क का भुगतान आवश्यक होगा, और उच्च न्यायालय इस शुल्क की राशि निर्धारित करेगा।
उदाहरण:
1. एक कानून का छात्र किसी महत्वपूर्ण आपराधिक निर्णय की प्रति चाहता है। वह उच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार इसे प्राप्त कर सकता है।
2. एक पत्रकार किसी चर्चित आपराधिक मामले के निर्णय की प्रति चाहता है। यदि वह शुल्क का भुगतान करता है और न्यायालय की शर्तें पूरी करता है, तो उसे प्रति दी जा सकती है।
धारा 404 का महत्व और प्रभाव
1. अभियुक्त के अधिकारों की सुरक्षा (Protection of Accused's Rights)
• अभियुक्त को यह जानने का पूरा अधिकार होता है कि न्यायालय ने उसके खिलाफ क्या निर्णय दिया है और क्यों।
• यह उसे अपील (Appeal) करने की सुविधा भी प्रदान करता है।
2. पारदर्शिता और न्यायिक जवाबदेही (Transparency and Judicial Accountability)
• निर्णय की प्रति उपलब्ध कराने से न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहती है।
• अभियुक्त को निर्णय के खिलाफ अपील करने के लिए पर्याप्त समय और जानकारी मिलती है।
3. मृत्युदंड मामलों में विशेष सुरक्षा (Special Safeguards in Death Penalty Cases)
• मृत्युदंड पाए अभियुक्तों को निर्णय की प्रति स्वतः ही मुफ्त में दी जाती है।
• अभियुक्त को यह सूचित किया जाता है कि उसे अपील दायर करने के लिए कितने समय का समय मिला है।
4. न्यायिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाना (Ensuring Smooth Judicial Process)
• न्यायालय द्वारा प्रभावित व्यक्तियों और अन्य इच्छुक व्यक्तियों को निर्णय की प्रति देने के नियम बनाकर न्यायिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है।
• इससे न्यायालय में अनावश्यक याचिकाएं (Petitions) कम होती हैं और प्रक्रिया स्पष्ट रहती है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 404 अभियुक्त को न्यायालय के निर्णय की प्रति प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अधिकार देती है। यह प्रावधान न्यायिक पारदर्शिता, अभियुक्त के अधिकारों की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की सुगमता सुनिश्चित करता है। खासतौर पर, मृत्युदंड प्राप्त अभियुक्तों को विशेष सुरक्षा प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें अपील का पूरा अवसर मिलता है।