हाईकोर्ट ने मेनका गांधी के खिलाफ मानहानि मामला रद्द करने से किया इनकार, ट्रायल कोर्ट के समन पर 2 हफ्ते की रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राजनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका संजय गांधी की वह याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट में अपने खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही और उन्हें जारी किए गए समन को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला एक निजी शिकायत पर आधारित है।
यह मामला एस.के. मित्तल द्वारा दायर निजी शिकायत से जुड़ा है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया। ट्रायल कोर्ट ने शुरू में 16 नवंबर 2019 को इस शिकायत को खारिज किया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मित्तल ने सेशन कोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन) दायर की। इसके बाद 30 जून 2025 को सेशन कोर्ट ने शिकायत खारिज करने वाला आदेश रद्द किया और मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए वापस ट्रायल कोर्ट के पास भेज दिया।
मामले पर दोबारा विचार करते हुए ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लिया और समन जारी किया। इससे असंतुष्ट होकर, गांधी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
गांधी के वकील ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट, सेशन जज द्वारा आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में की गई टिप्पणियों से प्रभावित हो गया। इस वजह से उनके पास BNSS की धारा 438 के तहत कोई प्रभावी उपाय नहीं बचा था।
यह भी तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता का हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आना उचित था, क्योंकि उसी कोर्ट (सेशन कोर्ट) के पास वापस जाना—जिसने ट्रायल कोर्ट को मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया—एक व्यर्थ कवायद होती।
जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े ने याचिकाकर्ता के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया।
याचिकाकर्ता की इस आशंका पर कि सेशन कोर्ट उनके मामले पर निष्पक्ष रूप से विचार नहीं करेगा, हाईकोर्ट ने कहा,
"यदि याचिकाकर्ता/आरोपी द्वारा पुनरीक्षण याचिका दायर की जाती है तो संबंधित सेशन कोर्ट सभी पहलुओं पर विचार करेगा और कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करेगा।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"यह स्पष्ट किया जाता है कि कोर्ट को शिकायत की सामग्री, दर्ज किए गए बयानों और ट्रायल कोर्ट के समक्ष रखे गए दस्तावेजों (यदि कोई हों) के आधार पर आदेश के गुण-दोष का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना होगा।"
अदालत ने आगे कहा कि सत्र न्यायालय (Sessions Court) 30.06.2025 के उस आदेश से प्रभावित नहीं होगा, जो पहले उसी सत्र न्यायालय द्वारा पारित किया गया।
इसके अनुसार, हाईकोर्ट ने आपराधिक याचिका खारिज की और कहा कि हाईकोर्ट में मामले की कार्यवाही के दौरान लगा समय, पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) दायर करने की समय-सीमा की गणना करते समय नहीं गिना जाएगा।
इसके अलावा, यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता एक वरिष्ठ नागरिक हैं और दिल्ली की निवासी हैं, अदालत ने समन आदेश के अमल पर दो सप्ताह के लिए रोक लगा दी, ताकि वे सत्र न्यायालय से संपर्क कर सकें।
Case Title : MRS MANEKA SANJAY GANDHI VS MR S K MITTAL