अगर यही उद्देश्य है तो लाइव स्ट्रीमिंग बंद करनी पड़ेगी: अभिलेखीय वीडियो मांगने वाले वकील से कर्नाटक हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अदालत की कार्यवाही के अभिलेखीय वीडियो अपने "शैक्षणिक उद्देश्य" और "प्रदर्शन मूल्यांकन" के लिए उपलब्ध कराने की मांग करने वाले वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि यदि इस तरह के उद्देश्यों के लिए रिकॉर्डिंग मांगी जाएगी तो अदालत को लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
जस्टिस सूरज गोविंदराज की एकल पीठ वकील अंगद कामत की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कर्नाटक में न्यायालयी कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग नियम, 2021 के तहत अभिलेखीय रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने से इनकार किए जाने को चुनौती दी गई।
सुनवाई के दौरान कामत ने स्वयं पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने नियमों के तहत निर्धारित प्रपत्र में आवेदन देकर 13 नवंबर 2025 को कोर्ट रूम नंबर-15 में हुई कार्यवाही की रिकॉर्डिंग मांगी थी और हाईकोर्ट को उनकी इस मांग पर जवाब देना चाहिए।
इस पर अदालत ने पूछा कि वह रिकॉर्डिंग किस उद्देश्य से चाहते हैं। कामत ने जवाब दिया कि उनका उद्देश्य शैक्षणिक अध्ययन और "प्रदर्शन मूल्यांकन" है।
इस पर जस्टिस गोविंदराज ने पूछा,
"किसका प्रदर्शन? जजों का, आपका या अदालत का?"
कामत ने स्पष्ट किया कि वह अपने वकील के रूप में प्रदर्शन का मूल्यांकन करना चाहते हैं।
यह सुनकर अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की,
"अगर यही आप चाहते हैं तो हमें लाइव स्ट्रीमिंग बंद करनी पड़ेगी।"
पीठ ने आगे कहा कि वह अधिक महत्वपूर्ण मामलों पर विचार करेगी।
हालांकि, अदालत ने याचिका खारिज नहीं की और कर्नाटक हाईकोर्ट, रजिस्ट्रार (सूचना प्रौद्योगिकी) तथा सहायक रजिस्ट्रार (सूचना प्रौद्योगिकी) को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले को 1 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने इसी वर्ष जनवरी में इस याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने न केवल अभिलेखीय रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की, बल्कि ऐसी रिकॉर्डिंग देने या उससे इनकार करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश अथवा मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने का भी अनुरोध किया।
याचिका के अनुसार वकील ने 11 दिसंबर 2025 को नियमों के तहत आवेदन देकर कुछ न्यायिक कार्यवाहियों की रिकॉर्डिंग मांगी लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी शाखा के सहायक रजिस्ट्रार ने संबंधित नियमों का हवाला देते हुए अनुरोध अस्वीकार किया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि जिस मामले में वह स्वयं पेश हुए उससे संबंधित 13 नवंबर 2025 की रिकॉर्डिंग और उससे जुड़ा समस्त डिजिटल विवरण सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए, ताकि याचिका के अंतिम निपटारे तक वह रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।