अवमानना की कार्रवाई न करना कमजोरी समझ लिया गया: रांची टर्मिनल मार्केट यार्ड के चुनावी उपयोग पर हाइकोर्ट की सख्त रोक
झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रांची के पंडरा स्थित टर्मिनल मार्केट यार्ड परिसर का किसी भी प्रकार के चुनावी कार्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा। अदालत ने चेतावनी दी कि उसके आदेशों का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि चुनावी कार्यों के नाम पर बार-बार टर्मिनल मार्केट यार्ड का उपयोग किए जाने से वहां वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों और गोदाम संचालकों की गतिविधियां बाधित होती हैं।
याचिकाकर्ता ने बताया कि हाइकोर्ट द्वारा समय-समय पर पारित आदेशों के बावजूद बाजार परिसर को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के भंडारण, मतगणना केंद्र और अन्य चुनावी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।
इसके कारण दुकानदारों और गोदाम मालिकों को अस्थायी रूप से हटाया जाता है, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ता है।
याचिका में कहा गया कि यह कार्रवाई कानून के अधिकार के बिना की जा रही है और प्रशासन की मनमानी को दर्शाती है।
अदालत ने रांची के उप निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा 6 जनवरी 2026 को दाखिल हलफनामे का उल्लेख किया। हलफनामे में कहा गया था कि मतगणना और ईवीएम के भंडारण के लिए जिलों में स्वायत्त महाविद्यालयों का ही उपयोग किया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रशासन हाइकोर्ट के पूर्व आदेशों से पूरी तरह अवगत है और उनका पालन कर रहा है।
खंडपीठ ने कहा कि भले ही हलफनामे में सीधे तौर पर कोई स्पष्ट घोषणा न की गई हो, लेकिन उसकी भाषा से यह संकेत मिलता है कि टर्मिनल मार्केट यार्ड के चुनावी उपयोग का कोई प्रस्ताव नहीं है।
अदालत ने कहा कि जब प्रशासन स्वयं यह स्वीकार कर रहा है कि वह पूर्व आदेशों से अवगत है तो वह उन आदेशों की अवहेलना करते हुए बाजार परिसर का चुनावी उपयोग नहीं कर सकता।
हाइकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हलफनामे में किसी प्रकार की अस्पष्टता हो, तब भी अब प्रशासन को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया जाता है कि पंडरा स्थित टर्मिनल मार्केट यार्ड का किसी भी चुनावी उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा ताकि व्यापारिक गतिविधियों में कोई व्यवधान न हो।
अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व में कई बार आदेश दिए जाने के बावजूद प्रशासन ने EVM के भंडारण और मतगणना के लिए बाजार परिसर का उपयोग जारी रखा जिससे छोटे दुकानदारों और गोदाम संचालकों का कारोबार कई दिनों तक पूरी तरह ठप हो जाता था।
हाइकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनावों के महत्व को देखते हुए उसने पहले कोई कठोर आदेश या अवमानना की कार्रवाई नहीं की, लेकिन इसे अदालत की कमजोरी समझ लिया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कमजोरी नहीं, बल्कि व्यावहारिक और यथार्थपरक दृष्टिकोण था, ताकि प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करने का समय मिल सके। दुर्भाग्यवश, पिछले छह से सात वर्षों में राज्य सरकार ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।
हाइकोर्ट ने कहा कि अब इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अदालत ने निर्देश दिया कि झारखंड के मुख्य सचिव, राज्य निर्वाचन आयुक्त और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संयुक्त रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे कि पंडरा स्थित टर्मिनल मार्केट यार्ड का किसी भी प्रकार के चुनावी कार्यों के लिए उपयोग न किया जाए।