झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला को उसके वैवाहिक घर में प्रवेश करने से रोकने और उसका अपमान करने के आरोप, मामले की परिस्थितियों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 85 के तहत क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने सास और ननद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप संबंधित अपराधों के आवश्यक कानूनी तत्वों को पूरा नहीं करते हैं।

जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में लोहरदगा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 21 अगस्त, 2025 को पारित संज्ञान आदेश और 10 अगस्त 2026 को आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी गई।

मामला एक महिला की ओर से अपने पति और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा था। महिला ने आरोप लगाया कि उसकी सास और ननद ने उसे लोवादिह स्थित वैवाहिक घर में प्रवेश करने से रोक दिया और उसका अपमान किया।

मारपीट और दहेज लेने के आरोप महिला के पति सुजीत मधुकर टोप्पो के खिलाफ लगाए गए। वहीं, धमकी देने का आरोप आर्टिमा एक्सेस के खिलाफ था जिसके साथ शिकायतकर्ता ने अपने पति के कथित अवैध संबंध होने का आरोप लगाया। आर्टिमा एक्सेस पर तीन लाख रुपये मांगने का आरोप भी लगाया गया।

जांच के बाद पुलिस ने याचिकाकर्ताओं समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 85, 115(2), 126(2), 352 और 351(2) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने अपराधों का संज्ञान लिया और आरोप तय किए।

कार्यवाही को चुनौती देते हुए सास और ननद ने हाईकोर्ट में कहा कि शिकायत में उन पर महिला के साथ मारपीट करने, उसे चोट पहुंचाने या धमकी देने का कोई आरोप नहीं है। उन्होंने दलील दी कि केवल वैवाहिक घर में प्रवेश से रोकना और अपमानित करना बीएनएस की धारा 85 के तहत क्रूरता का अपराध नहीं बनता।

राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोप आपराधिक कार्यवाही जारी रखने के लिए पर्याप्त हैं।

धारा 115(2) के तहत लगाए गए आरोपों की जांच करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि मारपीट का आरोप केवल शिकायतकर्ता के पति के खिलाफ था। बेंच ने कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सही भी मान लिया जाए, तब भी उनके विरुद्ध स्वेच्छा से चोट पहुंचाने का अपराध नहीं बनता।

इसी तरह BNS की धारा 351(2) के तहत धमकी देने का आरोप विशेष रूप से आर्टिमा एक्सेस के खिलाफ था, न कि सास और ननद के खिलाफ।

धारा 85 के तहत क्रूरता के आरोप पर विचार करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की,

“याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एकमात्र आरोप यह है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को उसके वैवाहिक घर में प्रवेश करने से रोका और उसका अपमान किया। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई अन्य आरोप नहीं है।”

हाईकोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को पूरी तरह सही मान लेने पर भी BNS की धारा 85 के तहत दंडनीय अपराध नहीं बनता।

कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

इसलिए हाईकोर्ट ने सास और ननद के खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इसमें 21 अगस्त, 2025 का संज्ञान आदेश और 10 अगस्त, 2026 का आरोप तय करने संबंधी आदेश भी शामिल हैं।

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