सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मामले में यूसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट से वापस ली अपील
पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने वडोदरा में सरकारी जमीन पर खुद को 'अतिक्रमणकारी' घोषित किए जाने के मामले में गुजरात हाईकोर्ट में दायर अपनी अपील सोमवार को वापस ली। अपील सिंगल जज के अगस्त 2025 के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि संबंधित जमीन का यूसुफ पठान के पक्ष में कोई आवंटन आदेश जारी नहीं हुआ और वह बिना किसी भुगतान के उस पर कब्जे में है।
यूसुफ पठान की अपील पर चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। यूसुफ पठान की ओर से सीनियर एडवोकेट शालीन मेहता ने कहा कि उन्होंने बार-बार समय इसलिए मांगा, क्योंकि वे वडोदरा नगर निगम के जवाब का इंतजार कर रहे थे।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि एक सरकारी परिपत्र के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को भूखंड आवंटित किए जाने का प्रावधान है। इसी आधार पर उनके मुवक्किल मामले को आगे बढ़ाना चाहते थे। हालांकि, निगम की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपील वापस लेने का निर्णय लिया।
सीनियर एडवोकेट ने कहा,
"मैंने अपने मुवक्किल से निर्देश लिए हैं। अगर यह होना है तो अदालत के बाहर होगा, अन्यथा नहीं होगा। मुझे उम्मीद थी कि हम उन्हें मना पाएंगे, लेकिन उनकी ओर से कुछ नहीं आया।"
दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपील वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि अपीलकर्ता के वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल ने अपील वापस लेने का निर्देश दिया। इसके बाद अपील को वापस ली गई मानते हुए खारिज कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला
यूसुफ पठान ने सबसे पहले 2012 में वडोदरा में एक भूखंड आवंटित किए जाने के लिए आवेदन किया। इसके बाद जमीन का बाजार मूल्य निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू हुई और वडोदरा नगर निगम ने बिना सार्वजनिक नीलामी के 978 वर्ग मीटर का भूखंड 99 वर्ष की लीज पर यूसुफ पठान को आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया।
हालांकि, राज्य सरकार ने 6 जून 2024 के आदेश के जरिए नगर निगम के इस प्रस्ताव को खारिज किया। सरकार ने नगर निगम को संबंधित भूखंड से अतिक्रमण तत्काल हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया था।
यूसुफ पठान ने इस आदेश को गुजरात हाईकोर्ट के सिंगल जज के समक्ष चुनौती दी थी। एकल जज ने अगस्त 2025 में उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि लंबे समय तक जमीन पर कब्जा रहने मात्र से उस व्यक्ति को जमीन पर कोई अधिकार हासिल नहीं हो जाता, खासकर तब जब उसके लिए कोई भुगतान भी नहीं किया गया हो।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसुफ पठान के पक्ष में जमीन आवंटित किए जाने का कोई आदेश मौजूद नहीं था। इसलिए उन्हें सरकारी जमीन का अतिक्रमणकारी माना गया।
सिंगल जज ने यह भी कहा था कि किसी भूखंड पर लंबे समय से कब्जा होना किसी गैरकानूनी स्थिति को वैध नहीं बना सकता। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि मशहूर हस्तियां समाज के लिए आदर्श होती हैं और अपनी प्रसिद्धि तथा सार्वजनिक मौजूदगी के कारण उनके व्यवहार का लोगों पर प्रभाव पड़ता है। कानून का पालन न करने के बावजूद उन्हें रियायत देना समाज में गलत संदेश भेज सकता है।
यूसुफ पठान ने इसके बाद सिंगल जज के आदेश के खिलाफ खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की। सुनवाई के दौरान उन्होंने राज्य सरकार की उस नीति का भी हवाला दिया, जिसके तहत अन्य क्रिकेटरों को जमीन आवंटित किए जाने की बात कही गई थी और इसी आधार पर मामले को आगे बढ़ाने के लिए समय मांगा था।
हालांकि, सोमवार को उनके वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अपील वापस ले ली गई और गुजरात हाईकोर्ट ने इसे वापस ली गई अपील के रूप में खारिज किया।