पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, गुवाहाटी हाईकोर्ट में दोनों पक्षकारों की जोरदार बहस

Update: 2026-04-22 02:49 GMT

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज FIR से जुड़ा है, जिसमें कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए ।

जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की पीठ ने दोनों पक्षकारों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले में सक्रिय भूमिका में हैं तो याचिकाकर्ता निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद कैसे कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि खेड़ा के फरार होने की कोई आशंका नहीं है और गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।

अन्य सीनियर वकील ने भी आरोपों को “दुर्भावनापूर्ण” बताते हुए कहा कि यह अधिकतम मानहानि का मामला हो सकता है, जिसे निजी शिकायत के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

वहीं, राज्य की ओर से असम के एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला केवल मानहानि का नहीं है बल्कि इसमें धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज, मुहर और कागजात तैयार कर राजनीतिक लाभ लेने और मुख्यमंत्री व उनकी पत्नी की छवि खराब करने की कोशिश की।

एडवोकेट जनरल ने यह भी कहा कि पुलिस का तत्काल गिरफ्तारी का इरादा नहीं था बल्कि केवल पासपोर्ट और संबंधित दस्तावेज हासिल करना उद्देश्य था। साथ ही उन्होंने यह तर्क भी दिया कि खेड़ा के फरार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह मामला पहले भी विभिन्न अदालतों में सुनवाई के दौर से गुजर चुका है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को स्थगित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि असम की अदालत में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर इस आदेश का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं झूठा बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी और मानहानि के तहत गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज की गई।

फिलहाल सभी पक्षकारों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं और अब हाईकोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार है।

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