DNA रिपोर्ट नेगेटिव होने पर भी पीड़िता का बयान सर्वोपरि: यौन हमले के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Update: 2026-04-02 06:19 GMT

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसे अन्य मेडिकल सबूतों से समर्थन मिलता है, तो केवल 'नेगेटिव' डीएनए (DNA) रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब अभियोजन पक्ष गवाही के माध्यम से अपराध सिद्ध कर देता है, तो DNA रिपोर्ट का मिलान न होना मामले को कमजोर नहीं करता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह फैसला जस्टिस प्रांजल दास की एकल पीठ ने सुनाया। मामला एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़ा है जिसके साथ उस समय बलात्कार किया गया जब वह घर पर अपने छोटे भाई के साथ अकेली थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को POCSO Act की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, जिसे अब हाइकोर्ट ने भी बरकरार रखा है।

जस्टिस दास ने अपने फैसले में कहा,

"पीड़िता की गवाही CrPC की धारा 164 के तहत दिए गए उसके बयान, उसके भाई की चश्मदीद गवाही और मेडिकल रिपोर्ट से यह सिद्ध होता है कि यौन हमला हुआ था। जहां तक DNA साक्ष्य का सवाल है पीड़िता के कपड़ों से मिला नमूना स्वयं उसका भी हो सकता है। केवल DNA मैच न होने से अभियोजन पक्ष के पुख्ता सबूतों को खारिज नहीं किया जा सकता।"

अपीलकर्ताओं ने हाइकोर्ट में तर्क दिया कि मेडिकल रिपोर्ट में विरोधाभास है और DNA रिपोर्ट आरोपियों के पक्ष में है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पीड़िता की उम्र से जुड़े दस्तावेजी सबूत पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मेडिकल राय के अनुसार पीड़िता की उम्र 14 से 16 वर्ष के बीच थी, जो उसे नाबालिग साबित करने के लिए पर्याप्त है।

अदालत ने अपने निर्णय में रेखांकित किया,

"ट्रायल कोर्ट ने इस पहलू पर सही चर्चा की है कि ठोस और सकारात्मक गवाही के सामने DNA के निगेटिव रिजल्ट के आधार पर मामले को खारिज नहीं किया जा सकता।"

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कमी नहीं पाई और माना कि आरोपियों ने 18 वर्ष से कम उम्र की नाबालिग लड़की के साथ जघन्य अपराध किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यौन अपराधों के मामलों में पीड़िता का बयान सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है, बशर्ते वह विश्वसनीय और सुसंगत हो। इसी के साथ अदालत ने दोषियों की अपील खारिज कर दी और उनकी सजा को यथावत रखा।

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