दलित युवती की मौत पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, CBI को प्रारंभिक जांच का निर्देश

Update: 2026-03-11 11:02 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की 20 वर्षीय दलित युवती की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से प्रारंभिक जांच कराने का आदेश दिया। युवती ने कथित तौर पर पूर्व गृह मंत्री के करीबी सहयोगी द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत की थी। अदालत ने कहा कि यदि जांच में प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो CBI, FIR दर्ज कर आगे की जांच करेगी।

जस्टिस एम. एम. सुंदरश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश युवती की मां द्वारा दायर याचिका पर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में कई आरोप और प्रत्यारोप लगाए गए हैं तथा घटनाक्रम जटिल है इसलिए स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच आवश्यक है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गवाहों के बयान और घटनाक्रम को देखते हुए युवती की मौत की परिस्थितियों की जांच जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस चरण में आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। साथ ही CBI को तीन महीने के भीतर यह तय करने को कहा गया कि FIR दर्ज की जानी चाहिए या नहीं।

सुनवाई के दौरान मृत युवती की मां की ओर से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि छेड़छाड़ की शिकायत वापस लेने से इनकार करने के बाद परिवार के तीन सदस्यों की हत्या कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि युवती की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई लेकिन इस मामले में FIR दर्ज नहीं की गई और पुलिस ने केवल प्रारंभिक जांच कर मामला बंद कर दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि युवती अपने चाचा के शव के साथ एम्बुलेंस में जा रही थी और रास्ते में वह फोन पर लगातार बातचीत कर रही थी तथा हत्याओं के खिलाफ विरोध करने की योजना बना रही थी। इसी दौरान वह एम्बुलेंस से गिर गई और उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि उसके सिर के पीछे गंभीर चोट थी, जिससे घटना पर संदेह पैदा होता है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि युवती के दो भाइयों और एक चाचा की अलग-अलग घटनाओं में हत्या कर दी गई, क्योंकि उन्होंने छेड़छाड़ की शिकायत वापस लेने से इनकार किया था।

\दूसरी ओर आरोपियों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि यह घटना एक दुर्घटना थी। राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने दलील दी कि युवती ने स्वयं एम्बुलेंस का पिछला दरवाजा खोलकर छलांग लगाई, जिससे उसकी मौत हुई।

हालांकि जस्टिस सुंदरश ने इस दलील पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत का विवेक इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग करता है। पीठ ने कहा कि घटना पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई थी इसलिए किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा इसकी जांच कराना उचित होगा।

मामले की पृष्ठभूमि में बताया गया कि युवती ने वर्ष 2019 में, जब वह नाबालिग थी छेड़छाड़ की शिकायत की थी। आरोप है कि इस मामले में बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण कानून के प्रावधान भी लागू नहीं किए गए और शिकायत वापस लेने के लिए परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही थीं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने CBI को युवती की मौत के पूरे घटनाक्रम की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया।

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