इंस्टाग्राम अकाउंट बंद करने के खिलाफ SFI ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, कल होगी सुनवाई
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को स्थायी रूप से बंद करने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका आरोप है कि शिकायत अपीलीय समिति (GAC) सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत तय समय सीमा में उनकी अपील पर फैसला करने में विफल रही है।
इस मामले की सुनवाई कल (गुरुवार) जस्टिस अमित महाजन करेंगे।
SFI और उसकी दिल्ली राज्य समिति के सचिव सूरज एलमोन द्वारा दायर यह याचिका वकील नमन कुमार के माध्यम से दाखिल की गई।
SFI ने GAC से निर्देश देने की मांग की कि वह उनके इंस्टाग्राम अकाउंट @SfiDelhi को बंद करने के खिलाफ 12 अगस्त को दायर अपील पर जल्द फैसला करे।
याचिका के अनुसार, इंस्टाग्राम ने 05 जुलाई को अकाउंट को स्थायी रूप से बंद कर दिया था। नोटिफिकेशन में कहा गया कि अकाउंट "किसी ऐसे अन्य अकाउंट से जुड़ा हो सकता है, जिसने हमारे नियमों का उल्लंघन किया है" और इसमें इंस्टाग्राम के "अकाउंट इंटीग्रिटी पर कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स" का हवाला दिया गया।
SFI का दावा है कि इंस्टाग्राम ने कथित तौर पर जुड़े अकाउंट की पहचान, उल्लंघन माना जाने वाला व्यवहार, कथित तौर पर तोड़ी गई विशेष नीति, या उस सामग्री का खुलासा नहीं किया, जिसके आधार पर अकाउंट बंद किया गया।
याचिका में कहा गया कि अकाउंट के लगभग 13,000 फॉलोअर्स थे और इसका इस्तेमाल SFI दिल्ली की गतिविधियों, अभियानों और छात्रों से संबंधित मुद्दों के बारे में जानकारी फैलाने के लिए एक स्थापित डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में किया जा रहा था।
याचिका में कहा गया,
"अकाउंट बंद होने के कारण याचिकाकर्ता एक महत्वपूर्ण और स्थापित माध्यम से वंचित हो गए, जिसके जरिए वे अपनी गतिविधियों, छात्र-केंद्रित अभियानों, मुद्दों और चिंताओं को बताते थे और छात्रों तथा आम जनता से जुड़ते थे।"
07 जुलाई को इंस्टाग्राम द्वारा याचिकाकर्ताओं की आंतरिक अपील यह कहते हुए खारिज करने के बाद कि अकाउंट "अभी भी अकाउंट इंटीग्रिटी पर हमारे कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स का पालन नहीं करता है", SFI ने 09 जुलाई को मेटा के शिकायत अधिकारी से संपर्क किया।
याचिका में दावा किया गया कि मेटा ने केवल शिकायत मिलने की बात स्वीकार की और अकाउंट बंद करने के संबंध में कोई ठोस जवाब नहीं दिया।
इसके बाद SFI ने 12 अगस्त को अपील दायर करके GAC का रुख किया। आरोप है कि 15 सितंबर तक GAC की वेबसाइट पर अपील "प्रक्रियाधीन" (under process) दिखाई देती रही और याचिकाकर्ताओं को कोई आदेश या निर्णय नहीं बताया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि GAC द्वारा उनकी अपील का समाधान न किए जाने के कारण उनके बोलने और अपनी बात रखने की आज़ादी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ।
उनका यह भी आरोप है कि अकाउंट को स्थायी रूप से बंद करने से पहले उन्हें इंस्टाग्राम के कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स के कथित उल्लंघन के मामले में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।
Title: Students' Federation of India & Anr v. Union of India & Anr