लोन डिफॉल्ट पर सिक्योरिटी चेक पेश करना क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लोन चुकाने में डिफॉल्ट होने पर बैंक द्वारा सिक्योरिटी चेक पेश करना, IPC की धारा 409 के तहत क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट का अपराध नहीं है।
चाइना ट्रस्ट कमर्शियल बैंक (CTBC) और उसके अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं को मंज़ूर करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने एक कर्जदार के पूर्व डायरेक्टर द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
उक्त कार्यवाही रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा,
“शिकायतकर्ता ने याचिकाकर्ताओं (CTBC) को कोई प्रॉपर्टी सौंपी नहीं थी; बल्कि यह एक सिक्योरिटी चेक था जो लोन एग्रीमेंट के तहत दिया गया, जिसका मकसद भविष्य में लोन एग्रीमेंट के तहत होने वाले किसी भी कर्ज और देनदारी को सुरक्षित करना था और उसे वसूलने के लिए चेक पेश किया जाना था।”
कोर्ट ने कहा कि विचाराधीन चेक ₹15 करोड़ के वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन एग्रीमेंट के तहत सिक्योरिटी के तौर पर जारी किया गया।
कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार, डिफॉल्ट होने पर बैंक सिक्योरिटी को लागू करने का हकदार था। इसलिए कोर्ट ने कहा कि न तो कोई चीज़ सौंपी गई और न ही चेक का कोई गलत इस्तेमाल हुआ।
कोर्ट ने कहा,
“चेक स्वेच्छा से एक कमर्शियल ट्रांजैक्शन के हिस्से के रूप में जारी किया गया और यह कॉन्ट्रैक्ट के सिक्योरिटी मैकेनिज्म का एक ज़रूरी हिस्सा था, जिसे लोन की देनदारी में डिफॉल्ट होने पर कैश कराने का इरादा था। कमर्शियल लोन ट्रांजैक्शन के बाद सिक्योरिटी चेक जारी करने से कोई भरोसे का रिश्ता नहीं बनता, बल्कि यह सिर्फ लेनदार और देनदार के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट की व्यवस्था का सबूत है। न तो कोई चीज़ सौंपी गई और न ही चेक का कोई गलत इस्तेमाल हुआ, जिसे पेश करना पूरी तरह से लोन एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार था।”
कोर्ट ने आगे कहा कि ज़्यादा से ज़्यादा शिकायतकर्ता यह तर्क दे सकता है कि कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य देनदारी नहीं थी, जिसके लिए चेक पेश किया जा सकता था। हालांकि, यह NI Act की धारा 138 के तहत कार्यवाही में बचाव होगा और यह क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट नहीं होगा।
कोर्ट ने आगे पाया कि शिकायत चेक डिसऑनर कार्यवाही के "जवाब में" दायर की गई, जिसे उसने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।
नतीजतन, बैंक अधिकारियों के खिलाफ जारी किए गए समन आदेश और गैर-जमानती वारंट रद्द कर दिए गए और शिकायत खारिज कर दी गई।
Case title: China Trust Commercial Bank v. State