पीछे बैठे यात्री के नशे में होने का आरोप, बिना किसी कारण संबंध के एक्सीडेंट के मामलों में योगदान देने वाली लापरवाही का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर यह आरोप लगाया जाता है कि दोपहिया वाहन पर पीछे बैठा यात्री शराब के नशे में था तो यह योगदान देने वाली लापरवाही साबित करने के लिए काफी नहीं है, जब तक कि कथित नशे और एक्सीडेंट होने के बीच कोई साफ कारण संबंध स्थापित न हो जाए।
जस्टिस प्रतीक जालान ने यह टिप्पणी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें कंपनी ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दावेदार, जो पीछे बैठा यात्री था, उसको दिए गए मुआवजे को चुनौती दी।
इंश्योरेंस कंपनी ने मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट (MLC) पर भरोसा किया, जिसमें दर्ज था कि अस्पताल में भर्ती होने के समय दावेदार शराब के नशे में था। इसी आधार पर, ट्रिब्यूनल ने योगदान देने वाली लापरवाही के लिए मुआवजे में 10% की कटौती की।
इस तरीके को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि दावेदार मोटरसाइकिल का ड्राइवर नहीं था, बल्कि पीछे बैठा यात्री था।
कोर्ट ने कहा,
“इंश्योरेंस कंपनी का मामला दावेदार की MLC रिपोर्ट पर आधारित है... इसमें दर्ज है कि दावेदार शराब के नशे में था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी नोट किया कि दावेदार के खून में अल्कोहल की मात्रा की जांच नहीं की गई... किसी भी स्थिति में मेरा मानना है कि यह मौजूदा मामले में प्रासंगिक नहीं है, क्योंकि दावेदार मोटरसाइकिल का ड्राइवर बिल्कुल नहीं था। इसके अलावा, कथित योगदान देने वाली लापरवाही और एक्सीडेंट के बीच कोई कारण संबंध स्थापित नहीं हुआ।”
मोहम्मद सिद्दीकी बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2020) मामले का हवाला दिया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़ित द्वारा कानून का उल्लंघन भी अपने आप योगदान देने वाली लापरवाही नहीं माना जाएगा, जब तक यह साबित न हो जाए कि अगर ऐसा उल्लंघन नहीं होता तो एक्सीडेंट से बचा जा सकता था।
इसलिए हाईकोर्ट ने योगदान देने वाली लापरवाही के लिए ट्रिब्यूनल की कटौती रद्द की और मुआवजे को बढ़ाने का आदेश दिया।
Case title: The Oriental Insurance Co Ltd v. Haazari Singh Rawat & Ors