सड़क हादसों की रिपोर्टिंग में लापरवाही पर दिल्ली हाइकोर्ट सख़्त, पुलिस आयुक्त को खामियां दूर करने के निर्देश

Update: 2026-02-11 10:26 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने सड़क दुर्घटना मामलों की जांच और रिपोर्टिंग में हो रही लापरवाहियों को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे मोटर दुर्घटना मामलों की निगरानी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए आवश्यक निर्णय लें और ठोस कदम उठाएं।

चीफ जस्टिस जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने अनूप कुमार रामपाल द्वारा दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिका में सड़क दुर्घटनाओं की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही चूकों और देरी को लेकर चिंता जताई गई।

याचिकाकर्ता का कहना था कि दुर्घटना मामलों में जांच अधिकारी समय पर प्रथम दुर्घटना रिपोर्ट (FAR), अंतरिम दुर्घटना रिपोर्ट (IAR) और विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (DAR) दाखिल नहीं कर रहे हैं।

इसके अलावा इन रिपोर्टों की प्रतियां संबंधित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण बीमा कंपनियों, पीड़ितों और यहां तक कि दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि इन रिपोर्टों को दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जा रहा है, जिससे पीड़ितों को समय पर मुआवज़े और अन्य कानूनी राहत पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

हाइकोर्ट ने यह संज्ञान लिया कि मोटर दुर्घटनाओं से संबंधित रिपोर्टिंग की योजना दिल्ली पुलिस द्वारा लागू की जा रही है। इसी के मद्देनज़र कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे उठाई गई शिकायतों पर गंभीरता से विचार करें।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

“अतः पुलिस आयुक्त इस याचिका में उठाई गई चिंताओं के संबंध में कानून द्वारा अनिवार्य सभी कदम शीघ्रता से उठाएं।”

हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटना मामलों में रिपोर्टिंग की प्रक्रिया न केवल औपचारिकता है बल्कि इससे पीड़ितों के अधिकार और न्याय से सीधा संबंध जुड़ा है। इसी आधार पर कोर्ट ने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन इस दिशा में प्रभावी सुधार सुनिश्चित करेगा।

इन निर्देशों के साथ दिल्ली हाइकोर्ट ने जनहित याचिका को बंद कर दिया।

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