मुकदमा चलाने या बचाव के लिए दलीलों में कही गई बातें मानहानि नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि दलीलों में कही गई बातें, चाहे खुद पर मुकदमा चलाने के लिए हों या बचाव के लिए, मानहानि का अपराध नहीं मानी जाएंगी।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि अगर कोई बयान न्यायिक कार्यवाही में दिया जाता है और उसे झूठा बताया जाता है तो इसका सही उपाय झूठी गवाही के अपराध के लिए है, न कि मानहानि के लिए अलग से शिकायत करके।
कोर्ट ने कहा,
"एक न्यायिक कार्यवाही में किसी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप, असल में एक ऐसा मामला साबित करने के लिए होते हैं, जिसे वह पक्ष सही और सच्चा मानता है। भले ही वह पक्ष केस हार जाए, यह नहीं कहा जा सकता कि यह सिर्फ दूसरे पक्ष को बदनाम करने के इरादे से किया गया। एक मुकदमेबाज को अपना केस चलाने या बचाव करने के लिए सभी कानूनी दलीलें देने का अधिकार है।"
इसमें आगे कहा गया:
"अगर न्यायिक कार्यवाही में कही गई हर बात को मानहानि की नज़र से देखा जाएगा, जबकि मुकदमा अभी भी चल रहा है तो यह किसी पक्ष के कोर्ट जाने और मानहानि के आरोपों में फंसने के डर के बिना, लगन से अपना केस पेश करने के अधिकार को दबा देगा।"
यह मामला सरदारनी सुरिंदर कौर सोढ़ी की संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाद से जुड़ा है, जिनका दिसंबर, 2013 में निधन हो गया। पार्टियों के बीच विरोधी वसीयतों को लेकर कई सिविल और वसीयत संबंधी मामले लंबित थे।
उक्त कार्यवाही के दौरान, याचिकाकर्ता हरकीरत सिंह सोढ़ी ने अपने बहनोई रविंदर सिंह गंडोक पर जालसाजी और बेईमानी का आरोप लगाया।
इसके बाद रविंदर सिंह गंडोक ने सोढ़ी के खिलाफ मानहानि की आपराधिक शिकायत दर्ज की, जिसने बाद में शिकायत के साथ-साथ समन आदेश को भी चुनौती दी।
सोढ़ी की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे यह पता चले कि लंबित मुकदमा, जिसका अभी अंतिम फैसला होना बाकी था, उससे शिकायतकर्ता की कोई मानहानि हुई हो। इसमें आगे कहा गया कि सोढ़ी ने उक्त कार्यवाही में केवल अपना बचाव किया, जो करना उनके अधिकार में था।
कोर्ट ने कहा,
"इस मामले में आरोप प्लीडिंग्स में लगाए गए, लेकिन किसी भी तरह से यह दावा नहीं किया जा सकता कि उन्हें पब्लिक में फैलाया गया या उन्होंने समाज के सही सोचने वाले सदस्यों की नज़र में शिकायतकर्ता की इज़्ज़त कम की है, जिससे लोग उस व्यक्ति से दूर रहें या उससे बचें।"
Title: HARKIRAT SINGH SODHI v. STATE OF NCT OF DELHI & ANR