दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल के आदेशों को लागू करने के लिए नियम बनाएं: हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा

Update: 2026-01-14 14:46 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार से कहा कि वह ऐसे कदम उठाए और उचित नियम बनाए ताकि दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल को अपने आदेशों को लागू करवाने के लिए उचित कानूनी अधिकार मिल सके।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि अगर ऐसा कोई प्रस्ताव दिया जाता है या कोई संशोधन सुझाया जाता है, तो केंद्र सरकार उस पर ध्यान देगी और जल्द से जल्द उसे मंज़ूरी देने पर विचार करेगी।

कोर्ट ने कहा,

"हमें उम्मीद है कि एक एग्जीक्यूशन मैकेनिज्म की ज़रूरत पर संबंधित अधिकारी विचार करेंगे और ऐसे मैकेनिज्म के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाएंगे।"

इसमें आगे कहा गया,

"हमें उम्मीद है कि उचित फैसला और ज़रूरी कार्रवाई जल्द से जल्द, हो सके तो आज से तीन महीने के अंदर पूरी कर ली जाएगी।"

बेंच ने NGO जस्टिस फॉर ऑल द्वारा दायर एक याचिका का निपटारा किया, जिसमें दिल्ली सरकार पर दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के तहत स्थापित दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल के प्रभावी कामकाज के लिए ज़रूरी नियम बनाने और अधिसूचित करने में विफलता का आरोप लगाया गया।

याचिका में कहा गया कि 1973 में अधिनियम बनने के बावजूद, ट्रिब्यूनल के आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ज़रूरी प्रक्रियात्मक ढांचा मौजूद नहीं है।

इसमें कहा गया कि अधिकारियों द्वारा ज़रूरी नियम बनाने में विफलता के कारण ट्रिब्यूनल का समग्र कामकाज स्पष्ट रूप से अनुपस्थित है।

याचिका में तर्क दिया गया कि नियमों की अनुपस्थिति ने हजारों शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों को एक प्रभावी और कारगर उपाय से वंचित कर दिया है, जो सीधे तौर पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता, त्वरित न्याय और गरिमापूर्ण जीवन के उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

याचिका में कहा गया,

"यह विधायी और प्रक्रियात्मक कमी इस माननीय न्यायालय की एक फुल बेंच द्वारा 27.08.2010 के अपने फैसले में प्रेसाइडिंग ऑफिसर दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल बनाम दिल्ली सरकार के मामले में न्यायिक रूप से देखी गई थी, जिसमें माननीय न्यायालय ने दृढ़ता से सुझाव दिया कि नियमों का एक सेट जल्द से जल्द बनाया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि माननीय ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।"

Title: JUSTICE FOR ALL v. HON'BLE LIEUTENANT GOVERNOR GOVT. OF NCT OF DELHI & ANR

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