“अत्यधिक संवेदनशील रवैया” : दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी टुडे से कहा, न्यूज़लॉन्ड्री की आलोचना हर हाल में अपमानजनक नहीं

Update: 2026-01-22 10:35 GMT

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को टीवी टुडे नेटवर्क को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा बनाए गए वीडियो को लेकर “अत्यधिक संवेदनशील (over sensitive)” रवैया अपना रहा है और हर आलोचनात्मक टिप्पणी को अपमानजनक या मानहानिकारक बताने की कोशिश कर रहा है।

जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि न्यूज़लॉन्ड्री के 75 वीडियो में से केवल एक वीडियो संदिग्ध हो सकता है, लेकिन शेष वीडियो केवल आलोचनात्मक टिप्पणियाँ हैं, जिन्हें अपमानजनक नहीं कहा जा सकता।

अदालत टीवी टुडे और न्यूज़लॉन्ड्री दोनों की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। ये अपीलें एकल न्यायाधीश के उस आदेश के खिलाफ थीं, जिसमें टीवी टुडे की अंतरिम निषेधाज्ञा (interim injunction) की मांग खारिज कर दी गई थी। हालांकि, एकल न्यायाधीश ने यह भी कहा था कि टीवी टुडे के पक्ष में प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनता है और न्यूज़लॉन्ड्री के बयानों का औचित्य साबित किया जाना आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान टीवी टुडे की ओर से एडवोकेट हृषिकेश बरुआ और न्यूज़लॉन्ड्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव तथा अधिवक्ता बानी दीक्षित उपस्थित थे।

शुरुआत में बरुआ ने न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा पोस्ट किए गए 75 वीडियो में से एक वीडियो अदालत को दिखाया, जिसमें न्यूज़लॉन्ड्री की मैनेजिंग एडिटर मनीषा पांडे की टिप्पणियाँ थीं। इस पर आपत्ति जताते हुए जस्टिस हरि शंकर ने कहा कि एकल न्यायाधीश का आदेश “गलत” है। उन्होंने कहा कि अगर अदालत मान भी ले कि कोई सामग्री मानहानिकारक है, तो भी केवल इस आधार पर उसे जारी रहने देना कि वह लंबे समय से ऑनलाइन है, उचित नहीं है।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि न्यूज़लॉन्ड्री को भाषा के चयन में अधिक संयम बरतना चाहिए था, लेकिन समस्या यह है कि टीवी टुडे यह दावा कर रहा है कि न्यूज़लॉन्ड्री उनके वीडियो क्लिप लेकर उन पर टिप्पणी ही नहीं कर सकता।

जब बरुआ ने अन्य वीडियो दिखाए, जिनमें आज तक के कार्यक्रमों पर सामान्य टिप्पणियाँ की गई थीं, तो अदालत ने स्पष्ट कहा,

“हर वह टिप्पणी जो आपको पसंद नहीं है, उसे अपमानजनक नहीं कहा जा सकता। यह आलोचना है, न कि disparagement।”

अदालत ने आगे कहा कि यदि कोई चैनल किसी कार्यक्रम को “बेकार” या “निरर्थक” कहता है, तो यह तीखी आलोचना हो सकती है, लेकिन इसे अपमानजनक नहीं कहा जा सकता। न्यायमूर्ति हरि शंकर ने कहा कि टीवी टुडे ने हर शब्द को अपमानजनक बताकर अपने ही मजबूत मामले को कमजोर कर दिया है।

कॉपीराइट उल्लंघन के मुद्दे पर बरुआ ने तर्क दिया कि न्यूज़लॉन्ड्री ने टीवी टुडे के पूरे क्लिप इस्तेमाल किए हैं, जो कॉपीराइट कानून के तहत “fair use” नहीं है। इस पर अदालत ने सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति किसी समाचार क्लिप को दिखाकर उसकी आलोचना करता है, तो क्या यह पूरी तरह निषिद्ध हो सकता है।

न्यूज़लॉन्ड्री की ओर से सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव ने कहा कि यह टीवी टुडे का मामला नहीं है कि न्यूज़लॉन्ड्री ने उनके कंटेंट को अपना बताकर पेश किया हो। उन्होंने कहा कि हर बार क्लिप दिखाते समय यह स्पष्ट किया गया कि वह टीवी टुडे का है और उसका उद्देश्य केवल आलोचनात्मक विश्लेषण था।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, खंडपीठ ने दोनों अपीलों में फैसला सुरक्षित रख लिया।

यह विवाद वर्ष 2022 का है, जब टीवी टुडे नेटवर्क ने न्यूज़लॉन्ड्री, उसके सीईओ अभिनंदन सेखरी और अन्य के खिलाफ एकल न्यायाधीश के समक्ष मुकदमा दायर किया था। इसमें ₹2 करोड़ का हर्जाना मांगते हुए कॉपीराइट उल्लंघन और अपने एंकरों, प्रबंधन व कर्मचारियों की मानहानि का आरोप लगाया गया था।

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