सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के मामले में FIR की मांग वाली याचिका खारिज: दिल्ली हाईकोर्ट ने वैधानिक उपाय अपनाने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने की घटना पर FIR दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को किसी संज्ञेय अपराध की आशंका है तो वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत उपलब्ध वैधानिक उपाय अपना सकता है।
चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इसी घटना को लेकर सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो पहले ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी हैं और उस मामले में अदालत आदेश भी पारित कर चुकी है।
खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा,
"इसी घटना को लेकर उनकी पत्नी पहले ही याचिका दायर कर चुकी हैं। अपील भी दाखिल हुई और मामले का निस्तारण हो चुका है। यदि आपको अब भी शिकायत है तो संबंधित प्राधिकरण के पास जाएं।"
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह केवल निजी मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक महत्व का विषय है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका में उठाया गया मुद्दा अकेली घटना से जुड़ा है, जिसके संबंध में वांगचुक की पत्नी पहले ही कानूनी कार्रवाई कर चुकी हैं।
FIR दर्ज कराने की मांग पर अदालत ने कहा,
"आप जाकर शिकायत दर्ज कराइए। यही आपकी एक प्रार्थना भी है। कानून के तहत आपके पास इसका उपाय उपलब्ध है।"
जब याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह स्वयं पीड़ित नहीं है, इसलिए FIR दर्ज नहीं हो पाएगी और SIT गठित की जाए तब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIT का गठन तभी संभव है, जब पहले FIR दर्ज हो। अदालत ने कहा कि नए कानून के तहत शिकायत मिलने के बाद FIR दर्ज करने से पहले पुलिस प्रारंभिक जांच भी कर सकती है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि 18 जुलाई की घटना के संबंध में वांगचुक की पत्नी पहले ही याचिका और अपील दायर कर चुकी हैं, इसलिए उसी घटना से जुड़ी मांगों पर दोबारा जनहित याचिका के माध्यम से सुनवाई नहीं की जा सकती।
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और याचिकाकर्ता कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपाय अपनाने के लिए स्वतंत्र है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि 18 जुलाई को जंतर-मंतर पर पुलिसकर्मी बिना वर्दी और पहचान पत्र के पहुंचे, प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की और सोनम वांगचुक को जबरन मंच से हटाकर अस्पताल ले गए जबकि वह आमरण अनशन पर थे।
वहीं, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिका में किसी संज्ञेय अपराध का प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। उन्होंने कहा कि यदि किसी संज्ञेय अपराध का आरोप है तो याचिकाकर्ता कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर सकता है। उन्होंने यह भी दलील दी कि यह "केवल प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की गई याचिका" है।
उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई। वह कथित नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में चल रहे आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके स्वास्थ्य की नियमित मेडिकल निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।