ऑटो फेस्टिवल से वायु प्रदूषण बढ़ने के दावे वाली जनहित याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

Update: 2026-01-15 09:51 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने गुरुवार को “बर्नआउट सिटी इंडिया” नामक ऑटो फेस्टिवल के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। यह कार्यक्रम 17 जनवरी को NSIC एग्ज़िबिशन ग्राउंड में प्रस्तावित है। याचिका में दावा किया गया कि इस आयोजन से पहले से गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ सकती है।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि याचिका केवल अटकलों पर आधारित है। इसमें ऐसा कोई वैज्ञानिक या ठोस डेटा प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि प्रस्तावित आयोजन से वायु या ध्वनि प्रदूषण बढ़ेगा।

याचिकाकर्ता का कहना था कि यह ऑटोमोटिव और लाइफस्टाइल फेस्टिवल ग्रैप मानकों का उल्लंघन करेगा। याचिका में तर्क दिया गया कि बड़े पैमाने पर वाहनों की प्रदर्शनी, ड्रिफ्ट और स्टंट ज़ोन तथा संगीत कार्यक्रमों के कारण पेट्रोल और डीज़ल की अधिक खपत होगी, जिससे आसपास के इलाकों की हवा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।

इस जनहित याचिका को वकील हेमंत जैन और एक अन्य व्यक्ति ने दायर किया था। सुनवाई के दौरान हेमंत जैन ने स्वयं पक्ष रखते हुए कहा कि कार्यक्रम में होने वाले स्टंट और गतिविधियों से पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषण स्तर बढ़ सकते हैं। इस पर हाइकोर्ट ने उनसे पूछा कि क्या इस दावे के समर्थन में कोई वैज्ञानिक आधार या प्रामाणिक अध्ययन मौजूद है, या यह केवल उनकी व्यक्तिगत आशंका है।

चीफ जस्टिस ने स्पष्ट रूप से कहा कि अदालतें केवल अटकलों के आधार पर कार्यवाही नहीं कर सकतीं। जब याचिकाकर्ता कोई वैज्ञानिक कारण या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके तो अदालत ने याचिका की गंभीरता पर सवाल उठाया।

हाइकोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या इस आयोजन के लिए किसी सक्षम प्राधिकरण से अनुमति ली गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई अनुमति उपलब्ध नहीं है। इस पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि उनके द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई और संभव है कि यह स्थानीय निकाय या भूमि स्वामी प्राधिकरण का विषय हो।

इस पर हाइकोर्ट ने कहा कि यदि यह आयोजन अनुमति के साथ होता है और ग्रैप मानकों का उल्लंघन करता है तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ही उपयुक्त प्राधिकरण होगा, लेकिन याचिकाकर्ता ने उस मंच का रुख नहीं किया।

अदालत ने कहा कि याचिका में कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और केवल यह कहना कि कुछ समय के लिए वाहन अधिक ईंधन का उपभोग करेंगे, पर्याप्त नहीं है। अंततः हाइकोर्ट ने मामले के गुण-दोष में गए बिना याचिका का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित जिला मजिस्ट्रेट याचिका में उठाई गई शिकायतों पर विचार करें और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें।

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