दिल्ली हाईकोर्ट ने 'द पायनियर' अखबार के खिलाफ कथित मानहानिकारक आरोपों और आपत्तिजनक सामग्री के प्रकाशन, पुनर्प्रकाशन और प्रसार पर तेलंगाना रक्षा सेना की नेता के. कविता समेत 15 पक्षकारों को रोक लगाई। रोक में पत्रकारों, यूट्यूब माध्यमों और डिजिटल मंचों को भी शामिल किया गया।

जस्टिस सचिन दत्ता ने अखबार का प्रकाशन करने वाली कंपनी सीएमवाईके प्रिंटेक की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे पर प्रतिवादियों को समन जारी किए। कोर्ट ने अंतरिम रोक की मांग वाली अर्जी पर भी नोटिस जारी किया।

मुकदमे में आरोप लगाया गया कि के. कविता ने 'द पायनियर' को लेकर यह आरोप लगाए कि अखबार का अधिग्रहण और नियंत्रण उनके भाई के पास है, जो भारत राष्ट्र समिति के नेता हैं। आरोपों में यह भी कहा गया कि अखबार पर अब भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

अखबार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि लगाए गए आरोप झूठे और मानहानिकारक हैं तथा इन्हें सामाजिक माध्यमों पर लगातार साझा और प्रसारित किया जा रहा है। इससे अखबार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है।

मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने के. कविता को मुकदमे में लगाए गए कथित मानहानिकारक बयान और आरोपों को प्रकाशित, दोबारा प्रकाशित, प्रसारित या किसी भी माध्यम से फैलाने से रोक दिया। कोर्ट ने इसी तरह की सामग्री वाले अन्य आरोपों को भी किसी मंच पर प्रसारित करने से रोक लगाई।

कोर्ट ने 14 अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ भी इसी तरह का आदेश दिया। इनमें पत्रकार, यूट्यूब माध्यम और डिजिटल मंच शामिल हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को मुकदमे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही अखबार की ओर से दायर अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी पर नोटिस जारी करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए रखा।

फिलहाल कोर्ट का आदेश कथित मानहानिकारक सामग्री के प्रकाशन और प्रसार पर रोक से संबंधित है। मुकदमे में लगाए गए आरोपों और प्रतिवादियों के जवाब पर आगे की सुनवाई के बाद अदालत इस मामले में विस्तृत निर्णय लेगी।

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