दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी की मौत के बाद परिवार को मिलने वाली फैमिली पेंशन, टर्मिनल बेनिफिट्स या उन पर मिलने वाले काल्पनिक ब्याज को परिवार की आय मानकर अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि इस तरह की राशि को परिवार की आय में शामिल करना अनुकंपा नियुक्ति देने के उद्देश्य को ही विफल कर देगा, जिसका मकसद मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना है।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने पंजाब एंड सिंध बैंक में चपरासी के पद पर कार्यरत रहे एक कर्मचारी की विधवा की अपील मंजूर करते हुए यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने वाला आदेश रद्द करते हुए बैंक को दो महीने के भीतर महिला को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया।

मृतक कर्मचारी की सेवा के दौरान ही मृत्यु हो गई और उनके परिवार में उनकी विधवा ही एकमात्र जीवित सदस्य थीं। महिला को ऑल इंडिया पंजाब एंड सिंध बैंक एम्प्लॉइज वेलफेयर सोसाइटी से 3,000 रुपये प्रतिमाह और 22,583 रुपये प्रतिमाह फैमिली पेंशन मिल रही थी।

महिला ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए बैंक में आवेदन किया, लेकिन आवेदन खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने दोबारा आवेदन किया, लेकिन उस पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उचित पद पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की। सिंगल जज ने बैंक को लागू योजना और दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया।

इसके बाद बैंक ने महिला के आवेदन पर विचार करते हुए उसे खारिज कर दिया। बैंक ने 'पीएसबी जीवन सहारा: अनुकंपा नियुक्ति और अनुकंपा नियुक्ति के बदले एक्स-ग्रेशिया राशि के भुगतान की व्यापक योजना' की धारा 5.1 का हवाला दिया। इसके तहत मृत कर्मचारी के परिवार को आर्थिक रूप से जरूरतमंद माना जाता है, यदि उसकी आय, जिसमें काल्पनिक आय भी शामिल है, मृत कर्मचारी के अंतिम वेतन के 60 प्रतिशत से कम हो या निर्धारित सीमा के भीतर हो।

बैंक के अनुसार महिला की मासिक आय 33,422.37 रुपये थी, जबकि मृत कर्मचारी का अंतिम वेतन 53,953.10 रुपये था। इसका 60 प्रतिशत 32,371.86 रुपये बनता था। इसलिए बैंक ने माना कि महिला योजना के तहत अनुकंपा नियुक्ति की पात्र नहीं हैं।

महिला ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि बैंक ने परिवार की आय की गणना गलत तरीके से की। उनका कहना था कि फैमिली पेंशन, टर्मिनल बेनिफिट्स पर मिलने वाले ब्याज और निवेश को शामिल किए बिना आय की गणना की जाए तो उनकी आय मृत कर्मचारी के अंतिम वेतन के 60 प्रतिशत से कम होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि बैंक के आदेश में जिन LIC पॉलिसियों के निवेश का उल्लेख किया गया, उनके पैसे वह पति की मृत्यु के बाद पहले ही निकाल चुकी थीं। इसके अलावा वेलफेयर सोसाइटी से मिलने वाली 3,000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन भी आवेदन दाखिल करने से पहले सरेंडर की जा चुकी थी।

बैंक की ओर से दलील दी गई कि योजना में परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन करते समय रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों को भी ध्यान में रखने का प्रावधान है और महिला योजना में निर्धारित आय सीमा को पूरा नहीं करती हैं।

डिवीजन बेंच ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति की योजना उन परिवारों के लिए है, जो आर्थिक रूप से जरूरतमंद हैं और जिन्हें अचानक आई आर्थिक तंगी से उबरने के लिए तत्काल सहायता की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि महिला की नियुक्ति का आवेदन परिवार की आय की गणना के आधार पर खारिज किया गया। इस गणना में यह मान लिया गया कि टर्मिनल बेनिफिट्स से मिले पूरे पैसे और निवेश को महिला अपनी पूरी जिंदगी इस्तेमाल नहीं करेंगी और उससे आय उत्पन्न होती रहेगी।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी धारणा का कोई आधार नहीं है। महिला से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अपनी जरूरतों के लिए टर्मिनल बेनिफिट्स का इस्तेमाल न करें और केवल उन्हें निवेश के रूप में सुरक्षित रखकर उनसे होने वाली आय को बनाए रखें।

डिवीजन बेंच ने कहा कि योजना में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मृत कर्मचारी के परिवार को मिले टर्मिनल बेनिफिट्स को अनिवार्य रूप से निवेश करना हो। ये लाभ कर्मचारी की सेवा से जुड़े अधिकार हैं, जो उसकी मृत्यु के बाद उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को मिलते हैं। इसलिए पूरी राशि को पूंजी मानकर उस पर काल्पनिक ब्याज को परिवार की आय में शामिल करना अनुकंपा नियुक्ति की योजना के उद्देश्य को ही खत्म कर देगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि योजना में 'नोटशनल इनकम' को ध्यान में रखने की बात कही गई। इसका मतलब वास्तविक रूप से प्राप्त आय या परिवार के पास मौजूद संपत्ति से उत्पन्न होने वाली आय हो सकती है। लेकिन इसका दायरा ऐसी काल्पनिक आय तक नहीं बढ़ाया जा सकता, जो उस टर्मिनल बेनिफिट्स की राशि पर मान ली जाए जिसे परिवार को आय देने वाले निवेश के रूप में बनाए रखना ही जरूरी नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि महिला की आय में 8,337.26 रुपये प्रतिमाह शामिल करना टिकाऊ नहीं है। इस राशि को हटाने के बाद उनकी मासिक आय 25,780.11 रुपये रह जाती है, जो मृत कर्मचारी के अंतिम वेतन के 60 प्रतिशत यानी 32,371.86 रुपये से कम है।

डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि महिला को मिलने वाली 21,888 रुपये की फैमिली पेंशन और वेलफेयर सोसाइटी से मिलने वाली 3,000 रुपये की राशि को उनकी मासिक आय का ऐसा हिस्सा नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से इनकार किया जाए।

कोर्ट ने कहा कि ये दोनों लाभ कर्मचारी की मृत्यु के बाद महिला को मिले हैं। इसलिए इन्हें अनुकंपा नियुक्ति का विकल्प या उस पर रोक नहीं माना जा सकता।

इस संबंध में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले गोविंद प्रकाश वर्मा बनाम भारतीय जीवन बीमा निगम का हवाला दिया। इस फैसले में कहा गया कि मृत कर्मचारी के परिवार के किसी सदस्य को नियमों के तहत मिलने वाले लाभ प्राप्त होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने केनरा बैंक बनाम एम. महेश कुमार के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फैमिली पेंशन या टर्मिनल बेनिफिट्स को अनुकंपा नियुक्ति का विकल्प नहीं माना जा सकता। अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी की मृत्यु के कारण परिवार पर आई अचानक आर्थिक कठिनाई से उसे उबरने में मदद करना है।

इन निष्कर्षों के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने वाला आदेश रद्द किया। सिंगल जज के आदेश को भी रद्द करते हुए डिवीजन बेंच ने बैंक को दो महीने के भीतर महिला को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया। महिला की अपील मंजूर कर ली गई।

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