COVID ड्यूटी के दौरान मौत पर मिलेगा 1 करोड़ मुआवजा, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार का फैसला रद्द किया

Update: 2026-03-31 07:50 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में COVID-19 के दौरान राहत कार्य करते हुए जान गंवाने वाले सरकारी स्कूल के उप-प्रधानाचार्य के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने दिल्ली सरकार द्वारा मुआवजा देने से इनकार करने का फैसला रद्द किया।

जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने दिवंगत डॉ. राजा राम सिंह की पत्नी की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें दिल्ली सरकार की कोविड राहत योजना के तहत मुआवजा मिलना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि छह सप्ताह के भीतर 1 करोड़ रुपये की राशि जारी की जाए।

मामला संगम विहार स्थित एक सरकारी स्कूल के उप-प्रधानाचार्य और प्रधानाचार्य डॉ. राजा राम सिंह से जुड़ा है, जिन्हें महामारी के दौरान स्कूल में बनाए गए हंगर रिलीफ सेंटर की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई। वे सूखा राशन और मध्याह्न भोजन वितरण जैसे कार्यों में सक्रिय रूप से लगे हुए।

इसी दौरान मई 2021 में वे COVID-19 से संक्रमित हो गए और बाद में अस्पताल में उनका निधन हो गया।

दिल्ली सरकार ने यह कहते हुए मुआवजा देने से इनकार किया था कि वह केवल अपनी नियमित जिम्मेदारियां निभा रहे थे और उन्हें विशेष रूप से कोविड ड्यूटी पर तैनात नहीं किया गया, इसलिए वे योजना के दायरे में नहीं आते।

हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्विवाद है कि दिवंगत को जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित केंद्र पर तैनात किया गया और वे COVID-19 से संबंधित कार्य कर रहे थे।

अदालत ने कहा,

“योजना के उद्देश्य को देखते हुए याचिकाकर्ता 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की हकदार हैं।”

इसी के साथ कोर्ट ने 3 नवंबर, 2023 के सरकारी आदेश को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में मुआवजा देने का निर्देश दिया।

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