'यात्रियों की सुरक्षा से सीधा संबंध': पायलटों के विश्राम मानदंड लागू करने की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने DGCA से मांगा पक्ष
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी) को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से उस याचिका पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा, जिसमें फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को स्थगित (abeyance) में रखने के DGCA के फैसले को चुनौती दी गई है। ये नियम पायलटों और फ्लाइट क्रू के लिए न्यूनतम विश्राम समय निर्धारित करते हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
याचिका में कहा गया है कि ये नियम पायलटों की थकान (fatigue management) को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। हालांकि, इंडिगो से जुड़े हालिया विवाद के बाद DGCA ने इन सुरक्षा प्रावधानों को 10 फरवरी 2026 तक स्थगित रखने का निर्णय लिया।
अदालत की टिप्पणियाँ
चीफ़ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी की:
“जब तक इन विनियमों को चुनौती नहीं दी जाती या इनमें कोई अंतर्निहित खामी नहीं पाई जाती, तब तक इन्हें लागू किया जाना चाहिए। इन नियमों का सुरक्षा उपायों से सीधा संबंध है। इसलिए इस याचिका में उठाई गई चिंताओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
याचिका और पक्षकार
यह याचिका सबरी रॉय, एक पूर्व विमान अभियंता, द्वारा दायर की गई है।
प्रतिवादी पक्ष ने याचिकाकर्ता की लोकस स्टैंडी पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि FDTL नियमों से संबंधित एक अलग याचिका पायलटों द्वारा पहले ही दायर की जा चुकी है और वह एकल पीठ के समक्ष लंबित है।
हालांकि, न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि सबरी रॉय की लोकस स्टैंडी को प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे एक विमान अभियंता रही हैं और उनके कार्यों का यात्रियों की सुरक्षा से प्रत्यक्ष संबंध है।
अदालत ने कहा:
“यह मामला सार्वजनिक हित से जुड़ा हुआ है। किसी एकल पीठ के समक्ष लंबित याचिका, अन्य व्यक्तियों को इस विषय पर याचिका दायर करने से नहीं रोक सकती।”
अगली कार्यवाही
इसके बाद, अदालत ने DGCA की ओर से वर्चुअली पेश हुईं अधिवक्ता अंजना गोसाईं को निर्देश दिया कि वे इस मामले में कल तक निर्देश प्राप्त कर अदालत को अवगत कराएँ।