दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं द्वारा दर्ज हर हमले की FIR में 'हाथ मारा' शब्द डालने के लिए पुलिस की आलोचना की
इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी महिला पर हमले या उसकी इज्Hत को ठेस पहुंचाने के आरोप वाली हर FIR में "हाथ मारा" शब्द का ज़िक्र होता है, जिसे शिकायतकर्ता ने मंज़ूरी नहीं दी होती।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि यह स्थिति "कानून का घोर दुरुपयोग" है और सभी पुलिस स्टेशनों के स्तर पर इस पर सोचने की ज़रूरत है।
कोर्ट ने कहा,
"यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि धारा 354 के तहत हर FIR में आमतौर पर 'हाथ मारा' शब्द लिखा जा रहा है, जिसे शिकायतकर्ता ने मंज़ूरी नहीं दी। यह कानून का घोर दुरुपयोग है और पुलिस स्टेशनों के स्तर पर इस पर सोचने की ज़रूरत है।"
जज ने यह टिप्पणी दो लोगों के खिलाफ BNS की धारा 115(2), 126(2), 74 और 3(5) के तहत दर्ज एक FIR रद्द करते हुए की।
कोर्ट ने आरोपी द्वारा दायर याचिका को मंज़ूरी दी, जिसमें महिला शिकायतकर्ता के साथ समझौते का हवाला देते हुए केस रद्द करने की मांग की गई थी, जो एक इवेंट मैनेजर के तौर पर काम करती थी। उसने आरोप लगाया कि उन लोगों ने शराब के नशे में उस पर हमला किया और वे चाहते थे कि वह उनके साथ डांस करे।
शिकायतकर्ता और उन लोगों ने आपसी दोस्तों और शुभचिंतकों की मदद से एक समझौता किया। इस समझौते में पार्टियों के बीच यह तय हुआ कि वे भविष्य में शांति से रहेंगे और एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह की कोई शिकायत या कार्रवाई नहीं करेंगे।
याचिका को मंज़ूरी देते हुए कोर्ट ने कहा कि पार्टियों ने स्वेच्छा से और बिना किसी डर या दबाव के समझौता किया और उन्होंने समझौते की शर्तों का पालन करने का वादा किया।
कोर्ट ने कहा,
"आरोपों की प्रकृति और यह देखते हुए कि उन्होंने मामला सुलझा लिया, पुलिस स्टेशन तिमारपुर, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, दिल्ली में BNS की धारा 115(2)/126(2)/74/3(5) के तहत दर्ज FIR नंबर 349/2025 और उससे संबंधित सभी आगे की कार्यवाही रद्द की जाती है।"
इसमें आगे कहा गया:
"इस आदेश की एक कॉपी DCP को भेजी जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिकायतकर्ता द्वारा न बताए गए कोई भी मनगढ़ंत बयान शिकायत में न डाले जाएं।"
Title: TENZIN YOUTEN & ANR v. THE STATE OF NCT OF DELHI AND ANR