तुगलकाबाद स्थित अंतर्देशीय कंटेनर डिपो में करीब चार साल से पड़े खतरनाक कचरे के निपटारे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को कड़ी फटकार लगाई।

अदालत ने कहा कि दोनों संस्थाएं जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रही हैं, जबकि कंटेनर पिछले चार वर्षों से कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के परिसर में पड़ा है।

जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे जिम्मेदारी से बचने का एक सामान्य उदाहरण बताया।

अदालत ने कहा कि न तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और न ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति कंटेनर में मौजूद खतरनाक सामान के सुरक्षित निपटारे की जिम्मेदारी लेने को तैयार है।

मामला सेफेलॉजिक फ्रेट एजेंसी एलएलसी की याचिका से जुड़ा है। विवाद उस कंटेनर को लेकर है, जिसमें एक आयातक ने कथित तौर पर सामान की गलत जानकारी देकर एल्युमिनियम के बजाय प्लास्टिक कचरा आयात कर लिया था। बाद में आयातक फरार हो गया और सामान से भरा कंटेनर तुगलकाबाद स्थित कंटेनर डिपो में ही पड़ा रह गया।

इससे पहले सीमा शुल्क अधिकारियों ने कहा था कि कंटेनर को खोलकर उसमें भरे सामान को बाहर निकालने के बाद कंटेनर याचिकाकर्ता कंपनी को वापस किया जाना चाहिए। हालांकि बाद में संबंधित प्राधिकरण ने दावा किया कि उसके पास यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।

29 जुलाई को हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आपसी मतभेद दूर करने का अंतिम अवसर दिया। अदालत ने चेतावनी दी थी कि यदि वे आपस में समाधान नहीं निकालते हैं तो अदालत को उचित आदेश जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

करीब 20 दिन का समय दिए जाने के बावजूद जब मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत ने सख्त रुख अपनाया। चूंकि कंटेनर में प्लास्टिक और धातु के कबाड़ के रूप में खतरनाक कचरा होने की बात सामने आई, इसलिए हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को मामले में आवश्यक पक्ष बनाने का निर्देश दिया।

20 अगस्त को पारित अपने ताजा आदेश में खंडपीठ ने कहा कि यह जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने का एक सामान्य उदाहरण है।

अदालत ने दोनों संस्थाओं को विवाद सुलझाने के लिए एक आखिरी मौका दिया और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर उसे कड़े और उचित निर्देश जारी करने पड़ सकते हैं।

हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के मुख्य वैज्ञानिक या सबसे वरिष्ठ वैज्ञानिक को व्यक्तिगत रूप से तुगलकाबाद स्थित अंतर्देशीय कंटेनर डिपो का निरीक्षण करने का निर्देश दिया।

दोनों अधिकारियों को यह बताते हुए रिपोर्ट दाखिल करनी होगी कि कंटेनर में मौजूद कथित खतरनाक कचरे का सुरक्षित और कानून के अनुसार निपटारा किस तरह किया जा सकता है।

मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।

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