अंजना ओम कश्यप-खान सर मानहानि विवाद मध्यस्थता के लिए भेजा, दिल्ली हाईकोर्ट ने समझौते की दी सलाह

Update: 2026-07-02 08:34 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने टीवी टुडे की पत्रकार अंजना ओम कश्यप और चर्चित शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर सहित अन्य शिक्षकों के बीच चल रहे मानहानि विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। जस्टिस तुषार राव गेडेला ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की सलाह देते हुए मामले को गुरुवार शाम चार बजे मध्यस्थता के लिए सूचीबद्ध किया।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जो नुकसान होना था, वह हो चुका है और अब दोनों पक्ष केवल स्थिति को संभालने का प्रयास कर सकते हैं।

अदालत ने कहा,

"ऐसा प्रतीत होता है कि पक्षकार आपसी सहमति से विवाद का समाधान कर सकते हैं। यदि किसी वरिष्ठ मध्यस्थ की नियुक्ति की जाती है तो दोनों पक्ष समझौते की संभावनाएं तलाशने के इच्छुक हैं।"

मामले में सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव को मध्यस्थ नियुक्त किया गया।

सुनवाई के दौरान अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे की ओर से पेश एडवोकेट ऋषिकेश बरुआ ने अदालत से अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों की ओर से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पूरी तरह मानहानिकारक हैं।

इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि दोनों पक्ष आपसी समझौते का रास्ता क्यों नहीं अपनाते।

जस्टिस गेडेला ने मौखिक रूप से कहा,

"हो सकता है कि कुछ बातें कहना उचित न रहा हो। किसी की आलोचना की जा सकती है लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होनी चाहिए। मुझे लगता है कि यह प्रतिक्रिया आपकी कही बातों पर आई है लेकिन उन्हें ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यदि उन हिस्सों को हटा दिया जाए तो बेहतर होगा।"

अंजना ओम कश्यप की ओर से यह भी कहा गया कि खान सर ने उनके बच्चों के स्कूल का नाम सार्वजनिक किया, जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। वकील ने कहा कि बच्चों से जुड़ी जानकारी तत्काल हटाई जानी चाहिए और शिक्षकों को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए।

इस पर अदालत ने खान सर की ओर से पेश वकील से कहा,

"कृपया यह सुनिश्चित करें कि बच्चों से जुड़ी जानकारी हटा दी जाए। बच्चों को इस विवाद में क्यों घसीटना? आप शिक्षाविद हैं यह आपकी पहचान का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। उनसे बात कीजिए और आपत्तिजनक शब्द भी हटवाइए।"

खान सर की ओर से अदालत को बताया गया कि पत्रकार के बच्चों से संबंधित जानकारी हटा दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वादी पक्ष को भी ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए, जिनसे विवाद बढ़े।

इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों को साथ बैठकर उन शब्दों और टिप्पणियों पर सहमति बनाने को कहा जिन पर आपत्ति जताई गई।

यह विवाद नीट परीक्षा प्रणाली पर आयोजित एक लाइव बहस के बाद शुरू हुआ था। आरोप है कि उस दौरान अंजना ओम कश्यप ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों की आलोचना करते हुए उन्हें धोखेबाज और केवल लोकप्रियता हासिल करने के लिए काम करने वाला बताया।

इसके बाद शिक्षकों की प्रतिक्रिया आने पर अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने दो करोड़ रुपये का मानहानि वाद दायर किया। इसमें खान सर की ओर से कथित रूप से इस्तेमाल किए गए बिकाऊ पत्रकार, चाटुकार, दलाली और फर्जी खबरों की दुकान जैसे शब्दों को हटाने की मांग की गई।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को तय की। तब तक अदालत मध्यस्थता की कार्यवाही के परिणाम का इंतजार करेगी।

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