AI बनाम कॉपीराइट: दिल्ली हाईकोर्ट ने CHATGPT के खिलाफ ANI की अंतरिम रोक की मांग खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने समाचार एजेंसी ANI द्वारा कृत्रिम AI आधारित चैटबॉट CHATGPT के खिलाफ दायर कॉपीराइट उल्लंघन मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार किया।
अदालत ने कहा कि इस स्तर पर CHATGPT पर अंतरिम रोक लगाने से न केवल कंपनी बल्कि आम जनता के हितों को भी नुकसान पहुंचेगा।
जस्टिस अमित बंसल ने आदेश सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ANI अंतरिम रोक के लिए आवश्यक आधार स्थापित करने में सफल नहीं हुई।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया CHATGPT के प्रशिक्षण के लिए ANI की मूल सामग्री का संग्रह कॉपीराइट अधिनियम की धारा 52(1)(क) के तहत निष्पक्ष उपयोग के दायरे में आता है और इसे इस स्तर पर कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि CHATGPT द्वारा दिए गए उत्तर ANI की सामग्री से पर्याप्त रूप से समान नहीं पाए गए, इसलिए प्रथम दृष्टया उन्हें कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
जस्टिस अमित बंसल ने कहा,
"ANI यह प्रथम दृष्टया साबित नहीं कर सकी कि CHATGPT ने उसकी सामग्री को याद रखकर उसी रूप में दोहराया। यदि इस स्तर पर अंतरिम रोक दी जाती है तो इससे केवल OPENAI ही नहीं, बल्कि व्यापक जनहित को भी अपूरणीय क्षति होगी।"
हालांकि, अदालत ने यह माना कि इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र भारतीय अदालत के पास है। मामले के विस्तृत आदेश की प्रति अभी जारी होना बाकी है।
यह मुकदमा नवंबर 2024 में दायर किया गया। ANI का आरोप है कि CHATGPT उसके मूल समाचारों का व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग कर रहा है और कई मामलों में उसके समाचारों को शब्दशः दोहराता है।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि CHATGPT ने कई बार ऐसे बयान और समाचार भी ANI के नाम से जोड़ दिए, जो उसने कभी प्रकाशित ही नहीं किए।
ANI का कहना है कि ऐसी हैलुसिनेशन जैसी गलतियां उसकी साख को नुकसान पहुंचा सकती हैं और फर्जी खबरों के प्रसार का कारण बन सकती हैं।
वहीं OPEN AI ने अदालत में कहा कि उसके AI मॉडल भारत में प्रशिक्षित नहीं किए गए और उसके सर्वर अमेरिका में स्थित हैं।
कंपनी का यह भी कहना था कि उसकी मशीन लर्निंग प्रक्रिया परिवर्तनकारी प्रकृति की है समाचारों में निहित तथ्य कॉपीराइट के दायरे में नहीं आते और यदि कोई समाचार संस्था नहीं चाहती कि उसकी सामग्री का उपयोग हो तो वह स्वयं को ब्लॉक सूची में शामिल कराने का अनुरोध कर सकती है।
मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त न्यायमित्र डॉ. अरुल जॉर्ज स्कारिया ने दलील दी थी कि कॉपीराइट सामग्री का उपयोग दो प्रकार का होता है अभिव्यक्तिपरक और गैर-अभिव्यक्तिपरक।
उन्होंने कहा था कि अधिकांश मामलों में OPEN AI ANI की सामग्री का गैर-अभिव्यक्तिपरक उपयोग करता है जिसे कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
मामले में वकील आदर्श रामानुजन भी न्यायमित्र के रूप में नियुक्त किए गए।