'दिल्ली सरकार ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती': हाईकोर्ट ने सर्दियों की ठंड में अस्पतालों के बाहर सो रहे बेघर लोगों के लिए इमरजेंसी शेल्टर के उपाय करने का आदेश दिया

Update: 2026-01-14 14:41 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि दिल्ली सरकार या उसकी एजेंसियां ​​उन मरीज़ों, अटेंडेंट और उनके परिवार के सदस्यों को शेल्टर देने की अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकतीं, जिन्हें शेल्टर की कमी के कारण शहर के अस्पतालों के बाहर कड़ाके की ठंड में सोने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने हाल ही में इस स्थिति का खुद संज्ञान लेने के बाद तुरंत शॉर्ट टर्म निर्देश जारी किए।

कोर्ट ने कहा कि यह सरकार और उसकी एजेंसियों का कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि लोगों को भले ही वे बेघर हों और अपने या अपने रिश्तेदारों के लिए बेहतर मेडिकल केयर की तलाश में हों, शेल्टर दिया जाए।

कोर्ट ने कहा,

"राज्य और उसकी एजेंसियां ​​जैसे कि अस्पताल, विकास प्राधिकरण और नगर निगम प्राधिकरण उन लोगों को पर्याप्त शेल्टर प्रदान करने की अपनी ज़िम्मेदारी और कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकते, जो जानबूझकर नहीं बल्कि मजबूरियों के कारण बेहतर मेडिकल केयर की तलाश में अस्पतालों में आ रहे हैं।"

इसमें आगे कहा गया कि राज्य और उसकी एजेंसियों को फंड की कमी या किसी अन्य संसाधन की कमी का हवाला देकर ऐसी सुविधाओं से इनकार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने ASG चेतन शर्मा और केंद्र सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल आशीष दीक्षित द्वारा मौके पर जाकर एक विस्तृत नोट दाखिल करने और स्थिति पर सुझाव देने के प्रयासों की सराहना की।

ऐसा करते हुए कोर्ट ने ज़मीनी स्तर पर स्थिति से निपटने के लिए शॉर्ट टर्म उपाय करने के लिए तत्काल निर्देश जारी किए।

बेंच ने निर्देश दिया कि अस्पतालों के आसपास के सबवे को बुधवार शाम तक DUSIB अपने कब्ज़े में ले ले ताकि सुविधाओं के साथ ज़्यादा से ज़्यादा बेड उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जा सके।

DUSIB अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे तुरंत अस्पताल के पास उपलब्ध जगहों पर जाएं और ज़रूरतमंदों को तुरंत शेल्टर देने के लिए टेंट या पंडाल लगाएं।

कोर्ट ने कहा,

"भूमि मालिक एजेंसियां, अस्पताल, नगर निगम, DDA और कोई भी अन्य प्राधिकरण DUSIB अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे, ऐसा न करने पर कोर्ट इस मामले में सख्त रुख अपना सकता है और गलती करने वाले अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। यह निर्देश दिल्ली पुलिस और DMRC अधिकारियों पर भी पूरी तरह से लागू होगा।"

इसमें कहा गया कि कल सुबह 10 बजे प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज (साउथ डिस्ट्रिक्ट) की अध्यक्षता में एक मीटिंग बुलाई जाएगी, जिसमें NDMC, DMC, DMRC, AIIMS, DUSIB, सफदरजंग अस्पताल, RML अस्पताल, लेडी हार्डिंग अस्पताल, दिल्ली पुलिस, L&DO के उच्चतम स्तर के अधिकारी या चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर या उनके उच्च रैंक के नॉमिनी शामिल होंगे ताकि शॉर्ट टर्म प्लान बनाया जा सके जिसे कल से ही लागू किया जाएगा।

लंबे समय के उपायों के लिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील को आज की तारीख में मौजूद कानूनी या गैर-कानूनी तरीकों सहित व्यापक सुझाव देने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि सुझावों में कोई भी अन्य कानूनी तरीका शामिल होना चाहिए, जिसे लागू किया जा सके।

बेंच ने अधिकारियों से यह भी अनुरोध किया कि वे भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए लंबी अवधि की रणनीति बनाने के लिए अपने सुझाव भी दें।

इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

Title: Court on its own motion v. State & Ors

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