नाबालिग से सहमति वाला प्रेम संबंध जमानत पर विचार का आधार हो सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO Act से जुड़े एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा है कि भले ही नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता, लेकिन यदि मामला सहमति वाले प्रेम संबंध का हो और पीड़िता की उम्र 18 वर्ष के क़रीब हो, तो जमानत पर विचार किया जा सकता है।
जस्टिस विकास महाजन ने वरुण कुमार सिंह की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला किसी हिंसा, दबाव या क्रूरता का नहीं, बल्कि प्रेम संबंध से उत्पन्न हुआ प्रतीत होता है।
मामले का संक्षेप
वरुण कुमार सिंह को अगस्त 2023 में गिरफ्तार किया गया था। उसके विरुद्ध अपहरण, बहला-फुसलाकर ले जाना, बलात्कार और POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया गया। अभियोजन का आरोप था कि वह लगभग 14 वर्ष की नाबालिग को आगरा ले गया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
जांच के दौरान नाबालिग ने बयान दिया कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई। चूंकि स्कूल से संबंधित कोई आयु प्रमाण उपलब्ध नहीं था इसलिए मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें उसकी उम्र 14 वर्ष से अधिक और 17 वर्ष से कम आंकी गई।
हाईकोर्ट ने एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब उम्र का निर्धारण मेडिकल जांच के आधार पर किया जाता है तो उसमें दी गई अधिकतम उम्र को ही पीड़िता की उम्र माना जाना चाहिए। इस आधार पर अदालत ने पीड़िता की उम्र 17 वर्ष मानी।
अदालत ने कहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति का कानूनन कोई महत्व नहीं है। लेकिन यदि उसकी उम्र 17 वर्ष मानी जाए तो प्रथम दृष्टया वह मानसिक रूप से पर्याप्त रूप से परिपक्व प्रतीत होती है और आरोपी के साथ उसका प्रेम संबंध जमानत देने के पक्ष में एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें पीड़िता के साथ कोई हिंसा या क्रूरता की गई हो। बल्कि यह मामला उस स्थिति का है, जहां वह आरोपी के साथ प्रेम संबंध में थी और स्वेच्छा से उसके साथ आगरा गई। यहां तक कि FIR में भी दोनों के मित्र होने का उल्लेख किया गया।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले के सभी प्रमुख गवाहों, जिनमें पीड़िता और उसकी मां शामिल हैं, की गवाही हो चुकी है। इसके अलावा आरोपी ढाई साल से अधिक समय से हिरासत में था।
इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत प्रदान की।