निर्माण दोष वाले लैपटॉप की बिक्री पर क्रोमा और HP सेवा में कमी के दोषी: चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग

Update: 2026-01-27 16:46 GMT

चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इन्फिनिटी रिटेल लिमिटेड (क्रोमा) और हेवलेट पैकार्ड ग्लोबल सॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड (HP) को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने कहा कि निर्माण दोष (manufacturing defect) से ग्रस्त लैपटॉप बेचने और बार-बार शिकायतों के बावजूद उसे न तो बदलने और न ही रिफंड करने की विफलता उपभोक्ता कानून का उल्लंघन है।

आयोग, जिसमें अमरिंदर सिंह सिद्धू (अध्यक्ष) और बृज मोहन शर्मा (सदस्य) शामिल थे, ने यह भी कहा कि मदरबोर्ड जैसे कोर कंपोनेंट का खरीद के थोड़े समय में खराब हो जाना स्वयं में अंतर्निहित दोष का संकेत है।

संक्षिप्त तथ्य

शिकायतकर्ता कनिका ने 2 अक्टूबर 2020 को क्रोमा (OP-1) से HP लैपटॉप ₹40,488 में खरीदा। खरीद के 8–10 दिनों के भीतर ही लैपटॉप में विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउज़र से संबंधित परफॉर्मेंस समस्याएं आने लगीं। शिकायत पर लैपटॉप को अधिकृत सर्विस सेंटर भेजा गया, जहां समस्याएं अस्थायी रूप से ठीक कर दी गईं।

हालांकि, 19 दिसंबर 2020 को—यानी खरीद के लगभग ढाई महीने के भीतर—लैपटॉप में फिर से गंभीर खराबी आ गई और स्क्रीन ब्लैक हो गई। जांच के बाद अधिकृत सर्विस सेंटर ने बताया कि मदरबोर्ड बदलना आवश्यक है। शिकायतकर्ता द्वारा लैपटॉप बदलने का अनुरोध हेड ऑफिस को भेजा गया, लेकिन HP (OP-2) ने इसे अस्वीकार कर दिया।

नई मशीन के बार-बार खराब होने और कानूनी नोटिस के बावजूद न तो लैपटॉप बदले जाने और न ही रिफंड दिए जाने से आहत होकर शिकायतकर्ता ने जिला आयोग का रुख किया और रिप्लेसमेंट/रिफंड, साथ ही मानसिक पीड़ा और पढ़ाई में नुकसान के लिए मुआवज़े की मांग की।

विपक्षी पक्षों की दलीलें

क्रोमा ने तर्क दिया कि वह केवल एक रिटेलर है और निर्माण दोष के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

HP ने कहा कि वारंटी शर्तों के अनुसार रिप्लेसमेंट या रिफंड का प्रावधान नहीं है और मदरबोर्ड बदलकर दोष ठीक किया जा सकता है। यह भी दलील दी गई कि विशेषज्ञ साक्ष्य के अभाव में निर्माण दोष सिद्ध नहीं होता।

अधिकृत सर्विस सेंटर कार्यवाही में एकतरफा (ex parte) रहा।

आयोग के अवलोकन और निर्णय

आयोग ने विपक्षी पक्षों की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वे कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे यह साबित हो कि वे मदरबोर्ड बदलने को तैयार थे और शिकायतकर्ता ने मरम्मत से इनकार किया।

आयोग ने माना कि मदरबोर्ड लैपटॉप का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है और खरीद के ढाई महीने के भीतर उसका खराब हो जाना, विशेषज्ञ साक्ष्य के बिना भी, अंतर्निहित निर्माण दोष का अनुमान लगाने के लिए पर्याप्त है।

आयोग ने यह भी कहा कि वारंटी अवधि में रहते हुए रिप्लेसमेंट या रिफंड से इनकार करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के अंतर्गत आता है।

अंतिम आदेश

आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए विपक्षी पक्षों को निर्देश दिया कि वे:

₹40,488 (लैपटॉप की इनवॉइस कीमत) 9% वार्षिक ब्याज सहित, शिकायत दायर करने की तारीख (17 जून 2021) से भुगतान की तारीख तक अदा करें;

शिकायतकर्ता लैपटॉप को विपक्षी पक्षों के जोखिम और खर्च पर वापस करेगी;

₹10,000 मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के रूप में अदा करें।

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